मातृ एवं भ्रूण चिकित्सा में 3 वर्षीय डीएम पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी
एसजीपीजीआई मातृत्व देखभाल ऐप विकसित

अमित घोष, डॉ आरके धीमन रहे मौजूद
लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़ । मातृत्व देखभाल के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा ऐप विकसित किया है।
शनिवार को संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के मातृ एवं प्रजनन स्वास्थ्य विभाग ने अपना 17वां स्थापना दिवस मनाया गया ।
स्थापना दिवस समारोह में उत्तर प्रदेश सरकार के चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष मुख्य अतिथि के रूप में एवं संस्थान निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर आरके धीमन उपस्थित रहे।
इस अवसर पर डेनमार्क मंत्रालय की आन्या विलेफ्रांस,टोके, थॉमस, जेन, सलिल दाधिच सहित विशिष्ट प्रतिनिधियों की उपस्थिति होकर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्रदान किया। मुंबई की स्त्री रोग विशेषज्ञ और गैर सरकारी संगठन आरमान की संस्थापक डॉ. अपर्णा हेगड़े विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रही ।
वहीं इस अवसर पर प्रोफेसर आरके धीमन ने विभाग की निरंतर प्रगति के लिए बधाई दी। मातृ एवं प्रजनन स्वास्थ्य विभाग
मातृ एवं भ्रूण चिकित्सा में 3 वर्षीय डीएम पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है।
प्रोफेसर मंदाकिनी प्रधान ने बताया कि संस्थान ने वीकेयर और डेनमार्क स्थित कॉर्डिया प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से एसजीपीजीआई मातृत्व देखभाल ऐप विकसित किया है।
यह एक व्यापक, उपयोगकर्ता केंद्रित मोबाइल एप्लिकेशन है। जिसे गर्भवती माताओं, परिवारों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की मदद के लिए डिज़ाइन किया गया है। जिसमें उन्हें समय पर जानकारी और बिना किसी बाधा के नैदानिक सहायता मिल सके।
प्रोफेसर नीता सिंह ने बताया कि मातृत्व देखभाल के डिजिटलीकरण से गर्भवती महिलाओं की दूर से और लगातार निगरानी करना संभव होगा, भले ही वे डॉक्टर से दूर हों। मरीज नियमित अंतराल पर अपना वजन, रक्तचाप, शुगर, हीमोग्लोबिन आदि दर्ज कर सकते हैं और डॉक्टर उनका मूल्यांकन करके मरीज का समय और पैसा बचा सकते हैं।
महिलायें अपने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को भी ऐप में जल्द से जल्द दर्ज कर सकती हैं। जिससे किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। मरीज की स्थिति के आधार पर, उन्हें आवश्यकतानुसार अस्पताल बुलाया जा सकता है।
यह प्लेटफॉर्म राज्य के दूरदराज के क्षेत्रों में भी डॉक्टर और मरीज को जोड़ने में मदद कर सकता है और माताओं और अजन्मे शिशुओं की गंभीर बीमारियों और मृत्यु को रोक सकता है। वर्तमान में यह सेवा एसजीपीजीआई में मरीजों के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है।



