उत्तर प्रदेशधर्म-अध्यात्म

ज्ञान, विद्या, बुद्धि और वाणी की अधिष्ठात्री माँ सरस्वती – मुक्तिनाथानन्द

रामकृष्ण मठ भक्तों ने की माँ सरस्वती की पूजा अर्चना

 

 लखनऊ भारत प्रकाश न्यूज़। बसंत पंचमी पर भक्तों ने मां सरस्वती की पूजा अर्चना की। शुक्रवार को

रामकृष्ण मठ निराला नगर में माँ सरस्वती की वैदिक मन्त्रों उच्चारण के साथ पूजा अर्चना की गयी।साथ ही यूट्यूब चैनेल : ‘रामकृष्ण मठ लखनऊ’ के माध्यम से सीधा प्रसारित किया गया। बसन्त पंचमी पर प्रथम चरण में देवी सरस्वती की प्रतिमा के पूजा के साथ-साथ बेदी में माँ सारदा देवी की तस्वीर को भव्य सजावट के साथ रखा गया एवं दोनों प्रतिमाओं की एक साथ पूजा हुई।

वहीं मठ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज ने कहा कि श्री रामकृष्ण परमहंस कहा करते थे कि माँ सारदा देवी स्वयं सरस्वती एवं ज्ञानदायनी है। जीवों को अज्ञान का अंधकार नाश करने के लिए उनका अविर्भाव हुआ था। इसी वचन को ध्यान में रखते हुये मठ में सरस्वती पूजा में माँ सरस्वती के साथ माँ सारदा देवी की पूजा भी की गयी।

बंसत पंचमी बसंत ऋतु के आगमन की सूचना है देवी सरस्वती व माँ सारदा के आशिर्वाद से हमारे जीवन में ज्ञान का प्रकाश होते रहे एवं हमारा जीवन भी बंसत ऋतु जैसा प्राणवान एवं आनन्दपूर्ण हो जाये इसी विश्वास के साथ सरस्वती पूजा मनाया जाता है।

उन्होंने बताया कि माँ सरस्वती देवी की इस पूजा व हवन में राजधानी के दूर-दराज से आए भक्तों ने मठ के अध्यक्ष श्रीमत् स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज एवं अन्य साधु, ब्रहृमचारीयों के संग पूजा में भाग लिया।

प्रातः 5 बजे शंखनाद व मंगल आरती के उपरान्त वैदिक मंगलाचरण एवं सरस्वती वंदना का समूह में गायन हुआ 6ः50 बजे से मठ अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानंद महाराज के निर्देशन में हुआ।

प्रातः 7ः15 बजे से मठ, लखनऊ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज द्वारा विशेष सत् प्रसंग (ऑनलाइन) ‘सरस्वती देवी व माँ सारदा देवी एक ही है‘ विषय पर प्रवचन दिया उन्होंने कहा कि सरस्वती देवी और सारदा देवी मूलतः एक ही हैं।

सारदा देवी, सरस्वती देवी का ही एक पावन नाम और स्वरूप है, जो ज्ञान, विद्या, बुद्धि और वाणी की अधिष्ठात्री हैं। विभिन्न परंपराओं और स्थानों में उन्हें अलग-अलग नामों से पूजित किया जाता है, परंतु उनका तत्त्व एक ही है। अतः सारदा और सरस्वती का भेद नाम मात्र का है, स्वरूप एक ही है।

माँ की पूजा रामकृष्ण मिशन आश्रम, सारगाछी, पश्चिम बंगाल से आये हुये ब्रह्मचारी निलोत्पल द्वारा सम्पन्न हुआ एवं तंत्रधारक के रूप में मठ के स्वामी इष्टकृपानन्द थे। सुबह 9ः15 बजे पूजा शुरू होने के पश्चात माँ सरस्वती देवी की स्तुति में भक्ति गीत प्रज्योत देवास्कर एवं उनकी टीम द्वारा गाया गया तथा उस दौरान तबले पर संगत सुमित मल्लिक ने दिया। तदोपरान्त देवी को बाल भोग भी चढ़ाया गया।

सरस्वती देवी व माँ सारदा देवी एक ही है’’ विषय पर रामकृष्ण मठ के प्रमुख स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज ने प्रवचन दिया। प्रवचन देते हुये स्वामी ने बताया कि वीणापाणी सरस्वती इस युग में माँ सारदा के रूप में अभिविमूर्त हुए है। अगर हम माँ सारदा देवी के पावन जीवन तथा अनूठा वाणी का अनुसरण करें तब हम अवश्य माता सरस्वती के आर्शीवाद से यर्थात ज्ञान प्राप्त करेगें एवं जीवन सफल हो जायेगा।

स्वामी ने कहा कि भगवान श्रीरामकृष्ण ने कहा ‘वह सारदा है, सरस्वती है। साधारण मानवी के समान दिखने पर भी वस्तुतः वह स्वयं साक्षात् जगदम्बा है, जिसकी कृपा कटाक्ष से मनुष्य को ज्ञान लाभ होता है। वह मनुष्यों को ईश्वरीय ज्ञान देने के लिए, जगत् को आलोक का मार्ग दिखाने के लिए अवतीर्ण हुई है।

स्वामी विवेकानन्द की दृष्टि में ‘माँ की महिमा’-उन्होंने बेलूड़ मठ में कहा था की ‘माँ सरस्वती के रूप में बंगला की अवतार हैं। बाहर से वे शान्ति से परिपूर्ण हैं, परन्तु भीतर से वे आसुरी शक्ति की विनाशक हैं। माँ सरस्वती के संबंध में स्वामी शिवानन्द ने कहा था कि हमारी माँ का नाम है सारदा। माँ स्वयं ही सरस्वती हैं।

वे ही कृपा करके ज्ञान देती हैं। ज्ञान अर्थात् भगवान को जानना, ज्ञान होने पर ही ठीक-ठीक सच्ची भक्ति होनी सम्भव है। ज्ञान के बिना भक्ति नहीं होती। शुद्ध ज्ञान और शुद्ध भक्ति दोनों एक हैं। माँ की कृपा से ही वह होना सम्भव है। माँ ही ज्ञान की स्वामिनी हैं।

वे यदि कृपा करके ब्रह्मविद्या का द्वार खोल दें, तभी जीव ब्रह्मविद्या का अधिकारी हो सकता है, अन्यथा नहीं। दुर्गा-सप्तशती में कहा गया है कि ‘‘सैषा प्रसन्ना वरदा नृणां भवति मुक्तये’’ अर्थात ये महामाया ही प्रसन्न होकर मनुष्यों को मुक्ति का वर प्रदान करती हैं।

स्वामी ने कहा कि सरस्वती या वाणी ब्रह्मा की शक्ति हैं, जो सृष्टि के रचयिता हैं – और दुनिया को ही दिव्य संगीत का साकार रूप कहा जाता है। रामकृष्ण को माँ वाणी का दर्शन हुआ था। जिन्होंने अपनी वीणा से दुनिया बनाई थी। सिस्टर निवेदिता लिखती हैं, रामकृष्ण को अपने अंदर से एक लंबा सफेद धागा निकलते हुए दिखता था।

उसके सिरे पर रोशनी का एक पुंज होता था। यह पुंज खुलता था, और उसके अंदर उन्हें माँ वीणा के साथ दिखती थीं। फिर वह बजाना शुरू करती थीं; और जैसे ही वह बजाती थीं, उन्हें संगीत पक्षियों, जानवरों और दुनिया में बदलते हुए और खुद को व्यवस्थित करते हुए दिखता था।

फिर वह बजाना बंद कर देती थीं और वे सब गायब हो जाते थे। रोशनी धीरे-धीरे कम होती जाती थी जब तक कि वह सिर्फ एक चमकदार पुंज न रह जाए, धागा छोटा होता जाता था, और पूरी दुनिया फिर से उनके अंदर समा जाती थी।

माँ ही साक्षात् सरस्वती हैं। उन्हीं की कृपा से हमारे मठ में उनकी नित्य पूजा होती है। वे ही कृपा करके सबका अज्ञान दूर करती हैं और ज्ञान-भक्ति प्रदान करती हैं।

पूजा में भारी तादात में श्रद्वालुओं ने उपस्थित होकर प्रातः 10ः45 बजे माँ सरस्वती को पुष्पांजलि अर्पण किया।

इस अवसर पर हातेखड़ि अनुष्ठान के माध्यम से मठ के स्वामी कृष्णपदानन्द द्वारा कुछ बच्चों को अक्षर से परिचिति कराया गया।

तदुपरांत देवी को अन्न भोग चढ़ाया गया और भोगारति एवं हवन हुआ। पूजा में आये लगभग 1000 भक्तगणों को मंदिर के पूर्वी प्रांगण में पके हुए प्रसाद का वितरण किया गया।

सांयकाल श्री श्री ठाकुर जी की आरती के उपरान्त माँ सरस्वती देवी की आरती एवं देवी स्तुति स्वामी ईष्टकृपानंद तथा देवीनाम संकीर्तन और काली कीर्तन स्वामी स्वामी मुक्तिनाथानन्द के नेतृत्व में हुआ। स्वामी सारदानन्दजी द्वारा रचित ’सपार्षद-श्री रामकृष्ण स्तोत्रम’ का पाठ मठ, स्वामी इष्टकृपानन्द के नेतृत्व में किया गया।

इस अनुष्ठान में विवेकानन्द कॉलेज ऑफ नर्सिग एवं विवेकानन्द स्कूल ऑफ नर्सिग की छात्राओं तथा अनेक शिक्षा प्रतिष्ठान के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। माँ सरस्वती की पूजा कल शनिवार 24 जनवरी को प्रातः 5 बजे से प्रारम्भ होगी। वैदिक मन्त्रोंच्चारण का पाठ

स्वामी इष्टकृपानन्द द्वारा होगा एवं प्रातः 7ः15 बजे से स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज द्वारा (ऑनलाइन) सत् प्रसंग में धार्मिक प्रवचन देंगे तथा प्रातः 8ः30 बजे पुष्पांजलि के पश्चात प्रातः 10 बजे देवी की दर्पण का विर्सजन व विदायी भजन एवं दधिकर्मा प्रसाद वितरण होगा।

सरस्वती देवी की मृन्मयी प्रतिमा का विसर्जन पूरे धार्मिक रीति रिवाज के साथ गोसाईगंज थाना अर्न्तगत ग्राम बक्कास में स्थित रामकृष्ण मठ के निजी तालाब मे किया जायेगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button