उत्तर प्रदेशधर्म-अध्यात्मबड़ी खबर

प्रत्येक जीव में शिव का दर्शन – मुक्तिनाथानन्द

रामकृष्ण मठ में स्वामी विवेकानन्द जयन्ती समारोह समापन

 

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। स्वामी विवेकानंद के जीवन को स्मरण कराया गया। रविवार को

श्रीरामकृष्ण मठ निराला नगर में 10 जनवरी से चल रहे स्वामी विवेकानन्द की 9 दिवसीय 164वीं जयंती समारोह का समापन दिवस मनाया गया।

कार्यक्रम के नवें दिन आध्यात्मिक शिविर का आयोजन प्रातः 8ः30 से दोपहर 1 बजे तक मठ के सभागार में आयोजित किया गया तथा समस्त कार्यक्रम यूट्यूब चैनेल ‘रामकृष्ण मठ लखनऊ’ के माध्यम से सीधा प्रसारित भी किया गया।

कार्यक्रम की शुरूआत प्रातः 8:30 बजे से श्रीरामकृष्ण मंदिर में सन्यासियों द्वारा शांति पाठ तदुपरान्त पुष्पांजलि हुई। साथ ही मठ के स्वामी इष्टकृपानन्द द्वारा भजन गायन किया। वहीं मठ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज के निर्देशन में गुरू प्रार्थना स्वामी इष्टकृपानन्द द्वारा गाया गया।

जलपान के उपरान्त प्रातः 10:30 बजे से मठ के सभागार में मठ के स्वामी विश्वदेवानन्द द्वारा उद्बोधन गीत की प्रस्तुति दी गई। उस दौरान तबले पर संगत स्वामी रामाधीशानन्द, मठ ने किया। तदोपरान्त रामकृष्ण सेवा समिति के सचिव उदयादित्य बनर्जी द्वारा वचनामृत से पाठ किया गया।

रामकृष्ण मठ एवं रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम, प्रयागराज के अध्यक्ष स्वामी अक्षयानन्द महाराज द्वारा ‘‘ईश्वर लाभ के उपाय’’ विषय पर प्रवचन देते हुए कहा कि भक्ति, सदाचार, निस्वार्थ सेवा, ध्यान और कर्तव्यपरायण जीवन के माध्यम

से मानव ईश्वर की कृपा और आत्मिक शांति प्राप्त कर सकता है तथा सच्चे मन, शुद्ध कर्म और करुणा भाव से किया गया। जीवन-व्यवहार ही ईश्वर-लाभ का सरल और प्रभावी मार्ग है। यह संदेश समाज में नैतिक मूल्यों और सकारात्मक जीवन-दृष्टि को प्रोत्साहित करता है।

‘माँ की बातें से पाठ’ सारदा संघ की रूबीना बनर्जी द्वारा किया गया। उत्तर प्रदेश- उत्तराखण्ड रामकृष्ण विवेकानन्द भाव प्रचार परिषद के सलाहकार सुखद राम पाण्डेय ने ‘हमारे जीवन में माँ सारदा देवी की प्रयोजनीयता’ पर एक आध्यात्मिक संदेश दिया।

जिसमेंं माँ सारदा देवी के आदर्श जीवन, सरलता, करुणा, त्याग और मातृत्व भाव को आज के जीवन में अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि माँ सारदा देवी का जीवन हमें निःस्वार्थ प्रेम, धैर्य, सेवा और आंतरिक शुद्धता की प्रेरणा देता है। उनके उपदेश और आचरण आधुनिक जीवन की चुनौतियों के बीच मानसिक शांति, नैतिकता और

आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। यह संदेश समाज में मानवीय मूल्यों, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। विवेकानन्द युवा संघ के समरनाथ निगम ने ‘स्वामी विवेकानन्द रचनावली से पाठ किया।

मठ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज द्वारा ‘शिव ज्ञान से जीव सेवा के लिए स्वामी विवेकानन्द के अह्वान’ विषय पर प्रवचन दिया। जिसमें उन्होंने स्वामी विवेकानन्द के प्रेरणादायी विचारों पर आधारित “शिव-ज्ञान से जीव-सेवा” विषय पर एक विशेष संदेश दिया।

जिसमें स्वामी विवेकानन्द के इस महान आह्वान को रेखांकित किया गया कि प्रत्येक जीव में शिव का दर्शन कर की गई सेवा ही सच्ची उपासना है। स्वामी विवेकानन्द ने आध्यात्मिक ज्ञान को केवल व्यक्तिगत मुक्ति तक सीमित न रखकर उसे समाज-सेवा से जोड़ा और मानव-कल्याण को धर्म का मूल आधार बताया।

स्वामी ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द का यह संदेश हमें सिखाता है कि भूखे को भोजन कराना, रोगी की सेवा करना, अशिक्षित को शिक्षा देना और पीड़ित के दुःख को दूर करना ही शिव-पूजा का वास्तविक स्वरूप है।

उनके अनुसार, जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति का उत्थान नहीं होता, तब तक आध्यात्मिक साधना अधूरी है। यह विचार सेवा, करुणा, समानता और आत्मविश्वास की भावना को सुदृढ़ करता है।

आज के सामाजिक परिप्रेक्षय में स्वामी विवेकानन्द का यह आह्वान अत्यंत प्रासंगिक है। जहाँ बढ़ती असमानता और संवेदनहीनता के बीच मानवता की सेवा का भाव आवश्यक हो गया है। यह संदेश युवाओं को राष्ट्र-निर्माण, सामाजिक उत्तरदायित्व और निःस्वार्थ सेवा के लिए प्रेरित करता है तथा आध्यात्मिक चेतना के साथ कर्मयोग के मार्ग पर चलने का आह्वान करता है।

मठ के स्वामी विश्वदेवानन्द एवं स्वामी स्वातमानन्द द्वारा भक्तिगीतों की प्रस्तुति दी गई। उस दौरान तबले पर संगत शुभमराज ने दिया।

प्रश्नोत्तर व परिचर्चा स्वामी मुक्तिनाथानन्द एवं स्वामी अक्षयानन्द द्वारा की गई* जिसमें युवाओं ने अपनी जिज्ञासा का समाधान प्रश्नोत्तर के माध्यम से किया तथा चयनित युवाओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

युवा सम्मेलन का समापन सामूहिक समापन गीत ‘श्री रामकृष्ण शरणम्’ स्वामी इष्टकृपानन्द के नेतृत्व में एवं विवेकानन्द युवा संघ के सदस्यों द्वारा गायन के पश्चात उपस्थित युवाओं के मध्य प्रसाद वितरण के साथ आध्यात्मिक सम्मेलन सम्पन्न हुआ।

विवेकानन्द युवा संघ के हरि ओम ने सूत्रधार के का दायित्व निभाया एव सभी वक्ताओं के विषय पर संक्षित आलेख प्रदर्शन किया एवं धन्यवाद ज्ञापन दिया। उन्होंने समारोह में उत्साह वर्धक व्याख्यान देने वाले सभी वक्ताओं की प्रशंसा की और इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए विशेष रूप से श्रीमत् स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी महाराज को भी तहे दिल से शुक्रिया अदा किया।

सांय 4:15 बजे से गदाधर अभ्युदय प्रकल्प लखनऊ के बच्चों द्वारा योगासन प्रदर्शन किया गया। उनके अद्भुत प्रदर्शन के लिए मठ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानंद ने बच्चों के उत्साहवर्धन के पुरस्कार प्रदान किया।

सायंकाल 5 बजे मुख्य मंदिर में देवीनाम संकीर्तन स्वामी ईष्टकृपानंद के निर्देशन में हुआ। श्री श्री ठाकुर की संध्यारति के उपरांत शास्त्रीय गायन का प्रस्तुतिकरण हुआ। जिसमें विख्यात गायक कुणाल वर्मा ने प्रस्तुति दी।

उस दौरान तबले पर संगत वाराणसी के जाने माने तबला वादक गौरव बनर्जी व हारामोनियम पर संगत के दिनकर द्विवेदी ने किया। कुणाल वर्मा द्वारा राग मारूविहाग में विलंबित तथा दु्रत ख्याल जोकि क्रमशः एक ताल तथा तीन ताल पर आधारित था तथा इसके बाद उन्होंने सुमधुर भजन के साथ गायन का समापन किया।

कार्यक्रम की समाप्ति परं मठ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज द्वारा सभी कलाकारों को अंग वस्त्र, कैलेन्डर, आध्यात्मिक पुस्तक, पौधे और स्वामी विवेकानन्द की तस्वीर भेट की गयी।

अन्त में उपस्थित सभी भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button