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हर हर महादेव के जयघोष से गूंजा लोधेश्वर महादेवा 

लाखों श्रद्धालुओं ने बम-बम भोले जयघोष के साथ किया जलाभिषेक

 

महाशिवरात्रि पर शिव की नगरी महादेवा में उमड़ा आस्था का जन सैलाब

बाराबंकी। रामनगर। लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। महाशिवरात्रि पर बम- बम भोले के जयघोष से शिवालय गूंज उठे । रविवार को महाशिवरात्रि पर शिव नगरी महादेवा में आस्था का जन सैलाब उमड़ पड़ा। देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर त्रिनेत्र धारी भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख समृद्धि की कामना किया।

बम- बम भोले के जयघोष के साथ गूंजा शिवालय..

बम-बम भोले, हर हर महादेव की गूंज के साथ कंधों पर कांवर लिये समूहों में जाने वाले भक्तों की टोलियां भगवान शिव के लोधेश्वर मंदिर के लिये प्रसिद्ध है। जहां भक्तों की इच्छा अति प्राचीन काल से पूरी हो रही है।

लाखो श्रद्धालुओं का काँरवा हर साल फाल्गुन के महीने महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रसिद्ध शिवलिंग की पूजा गंगा जल अर्पित करने के लिए आते हैं।

जानें लोधेश्वर महादेवा मंदिर का रहस्य..

यह प्राचीन शिव मंदिर जिला बाराबंकी की राम नगर तहसील के महादेवा गांंव में घाघरा नदी के तट पर स्थित है। लोधेश्वर महादेव का एक प्राचीन इतिहास है। इस मंदिर का शिवलिंग पृथ्वी पर उपलब्ध 52 अनोखे एवं दुर्लभ शिवलिंगों में से एक माना जाता है।

ऐसा माना जाता है कि, महाभारत काल से पूर्व, भगवान शिव को एक बार फिर से पृथ्वी पर प्रकट होने की इच्छा हुई। तथाकथित पंडित लोधेराम अवस्थी एक विद्वान ब्राह्मण, सरल, दयालु और अच्छे स्वभाव वाला ग्रामीण था। एक रात भगवान शिव ने सपनों में उसे दर्शन दिये।

अगले दिन, लोधेराम, जो पुत्र विहीन थे, अपने खेत में सिंचाई करते हुए, उसने एक गड्ढा देखा जहां से सिंचाई का पानी पृथ्वी में जाकर गायब हो रहा था। उन्होंने उस गड्ढे को पाटने के लिए कड़ी मेहनत की, लेकिन असफल घर लौटा।

रात में, उसने फिर से उसी प्रतिमा को अपने सपनों में देखा, और मूर्ति को फुसफुसाते हुए यह कहते हुये सुना ‘उस गड्ढे में जहां पानी जाकर गायब हो रहा है, मेरा स्थान है, वहां मुझे स्थापित करो, इससे मुझे तुम्हारे नाम से प्रसिद्धि मिलेगी।

ऐसा कहा जाता है कि अगले दिन जब लोधेराम उस गड्ढे की खुदाई कर रहा था, तभी उसका उपकरण किसी कठोर पदार्थ से टकराया और उसने अपने सामने मूर्ति देखी और उसमें रक्त स्राव हो रहा था।

जहां उपकरण मूर्ति पर पड़ा था, यह निशान आज भी देखा जा सकता है। इस दृश्य से लोधेराम भयभीत हुआ और मूर्ति के लिये खुदाई जारी रखी। मूर्ति के दूसरे छोर तक पहुंचने में असफल रहा। उसने उसे जस का तस छोड़ दिया, और उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण किया।

जिसे अर्ध-नाम ‘लोधे’ और भगवान शिव के ‘ईश्वर’ का नाम दिया, और इस प्रकार भक्त के नाम अर्थात लोधेश्वर से प्रसिद्ध हो गया। तद्पश्चात ब्राह्मण को चार बेटों का आशीर्वाद मिला, महादेवा, लोधौरा, गोबरहा और राजनापुर के नाम दिये गये, इन नामों वाले गांव आज भी विद्यमान हैं।

महाभारत में प्राचीन मंदिर का उल्लेख..

महाभारत में कई प्रकरण हैं जहां इस प्राचीन मंदिर का उल्लेख है। महाभारत के बाद पांडव ने इस स्थान पर महायज्ञ का आयोजन किया था। जहाँ पर एक कुंआ आज भी पांडव-कूप के नाम से अपने अस्तित्व में है।

ऐसा कहा जाता है कि इस कुंए के पानी में आध्यात्मिक गुण हैं, और जो कोई इस पानी को पीता है उसकी कई बीमारियां ठीक हो जाती हैं।

भगवान भूत भावन शिव की नगरी महादेवा में कांवरियों की छम छम करते घुंघरूओ की आवाजो बम बम महादेव का उद्घोष करते हुए लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने त्रिनेत्र धारी भगवान शिव का दूध अक्षत बिल्ब पत्र भांग धतूरा मिष्ठान आदि सामग्री के साथ पहुंच कर जलाभिषेक रुद्राभिषेक करके सुख समृद्धि की कामना किया।

वहीं महाभारत कालीन तीर्थ स्थल कुंतेश्वर धाम में भी शिवार्चन करने वाले श्रद्धालुओं का दिनभर तांता लगा रहा।

महाशिवरात्रि पर जिले के नागेश्वर नाथ मंदिर औसानेश्वर घाट मंदिर कुंतेश्वर महादेव मन्दिर पूर्णेश्वर महादेव मंदिर जागेश्वर महादेव मंदिर सिद्धेश्वर महादेव मंदिर समेत जिले के विभिन्न गांवों के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक व रुद्राभिषेक करके अपनी सुख समृद्धि की कामना किया।

वहीं सुरक्षा की दृष्टि से जिले के आलाधिकारियों समेत तहसील प्रशासन व पुलिस दिनभर पेट्रोलिंग करते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा में तत्पर दिखे।

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