सुनने की कमी एक “मूक विकलांगता” जो देरी से बढ़ती – प्रो आरके धीमन
सुनने की क्षमता विकसित करने को आधुनिक उपकरण स्थापित

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। सुनने की क्षमता विकसित करने के लिए आधुनिक उपकरण स्थापित किया गया।
संजय गांधी पीजीआई में वर्ल्ड हियरिंग डे के उपलक्ष्य में न्यूरो-ओटोलॉजी लैब का उद्घाटन किया गया। शुक्रवार को “कम्युनिटीज टू क्लासरूम्स में हियरिंग केयर फॉर एवरी चाइल्ड ” थीम के तहत एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों में सुनने की कमी की समय पर पहचान के महत्व को रेखांकित करना था। जिसे
न्यूरोसर्जरी विभाग के न्यूरो-ओटोलॉजी यूनिट के प्रमुख डाक्टर रवि शंकर और उनकी टीम ने बच्चों में सुनने की समस्या की समय पर पहचान के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि समय रहते पहचान होने से बच्चों के भाषण, भाषा विकास, संज्ञानात्मक क्षमता और सामाजिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने इस प्रक्रिया में समुदाय की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
केन्द्रीय विद्यालय पीजीआई परिसर के विद्यार्थियों ने इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसके साथ ही कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी करवा चुके बच्चों के अभिभावक तथा संभावित मरीजों के अभिभावक भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे और उन्होंने अपने अनुभव साझा किए।
वहीं संस्थान निदेशक प्रो आर के धीमन ने उन्नत न्यूरो-ओटोलॉजी प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर देवेन्द्र गुप्ता और न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अवधेश जैसवाल भी उपस्थित रहे।
नई उन्नत प्रयोगशाला में आधुनिक श्रवण परीक्षण उपकरण स्थापित किए गए हैं, जो सामान्य तथा जटिल कोक्लियर इम्प्लांट मामलों की योजना और प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
प्रो. धीमन ने कहा कि सुनने की कमी एक “मूक विकलांगता” है, जो देरी से बढ़ती है लेकिन समय पर हस्तक्षेप से प्रभावी रूप से नियंत्रित की जा सकती है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से बच्चों के श्रवण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता को दोहराया।
कार्यक्रम का समापन इस वर्ष की वैश्विक थीम के अनुरूप सुरक्षित श्रवण प्रथाओं को बढ़ावा देने और सभी बच्चों के लिए समान रूप से श्रवण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के सामूहिक संकल्प के साथ सम्पन्न हुआ।



