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क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी व संक्रमण निदान को एकत्र होंगे स्वास्थ्य विशेषज्ञ

एसजीपीजीआई में दो दिवसीय 21वां वार्षिक सम्मेलन

 

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी में दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन होने जा रहा है। जिसमें क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी व संक्रमण निदान के लिए मंथन किया जायेगा।

संजय गाँधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में 6 एवं 7 फरवरी को इंडियन एसोसिएशन ऑफ़ मेडिकल माईक्रोबॉयोलॉजिस्ट्स के उत्तर प्रदेश – उत्तराखंड चैप्टर (यूपी-यूके माइक्रोकॉन 2026) का 21वां वार्षिक सम्मेलन का आयोजन होगा।

जिसमें क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स, चिकित्सक, शोधकर्ता, उद्योग विशेषज्ञ और नीति निर्माता एकत्र होकर संक्रामक रोगों के निदान और प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और मंथन करेंगे।

यह दो दिवसीय सम्मेलन “क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी में प्रगति: मरीज देखभाल को आकार देना” विषय पर केंद्रित होगा और यह इन-पर्सन फॉर्मेट में आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन माइक्रोबायोलॉजी के क्षेत्र में नवीनतम प्रगति, नवाचारी निदान और उपचार रणनीतियों पर चर्चा करने का मंच प्रदान करेगा। गुरुवार को

सम्मेलन की ऑर्गनाइजिंग चेयरपर्सन और माइक्रोबायोलॉजी विभाग तथा संक्रामक रोग विभाग की प्रोफेसर और विभाग की प्रमुख, डॉ. रूंगमई एसके मारक ने सम्मेलन के उद्देश्य को साझा करते हुए कहा कि “यूपी-यूके

माइक्रोकॉन 2026 में हम नए पैथोजन्स, एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध और मानव माइक्रोबायोम के स्वास्थ्य पर प्रभाव के बारे में महत्वपूर्ण शोध और तकनीकी नवाचारों पर चर्चा करेंगे। डॉ रूंगमई ने आगे बताया कि “यूपी-यूके माइक्रोकॉन २०२६ के प्रमुख फोकस क्षेत्रों में शामिल हैं।

नए पैथोजन्स: नए और पुनः उभरते हुए संक्रामक रोगों पर चर्चा, और इनका शीघ्र निदान करने के लिए आवश्यक आधुनिक तकनीकें, विशेष रूप से फंगल संक्रमणों पर जोर दिया जाएगा।

एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (एएमआर): वैश्विक स्वास्थ्य खतरे एएमआर को संबोधित करना और दवाओं के प्रतिरोधी बैक्टीरिया के खिलाफ नवाचार रणनीतियों की खोज।

मानव माइक्रोबायोम: मानव स्वास्थ्य और रोगों के विकास पर माइक्रोबायोम के जटिल प्रभाव का अध्ययन।

प्रौद्योगिकी में प्रगति: मल्टीप्लेक्स आरटी-पीसीआर पैनल और माल्डी-टॉफ-एमएस जैसे नए तकनीकी उपकरणों का प्रदर्शन, जो क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशालाओं में क्रांति ला रहे हैं।

इसके अलावा सम्मेलन में विशेषज्ञों के लेक्चर और मौखिक प्रस्तुतियाँ होंगी, और आठ विशिष्ट प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप्स भी आयोजित की जाएंगी। जिनमें बैक्टीरियोलॉजी, पैरेसिटोलॉजी, मायकोलॉजी, टीबी, सीरोलॉजी और इम्यूनोलॉजी, वायरोलॉजी, संक्रमण नियंत्रण, बंडल केयर, और चिकित्सा शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।

ये कार्यशालाएँ पोस्टग्रेजुएट छात्रों और प्रारंभिक करियर वाले क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स के लिए ज्ञानवर्धन और व्यावहारिक कौशल के विकास में सहायक होंगी।

सम्मेलन में ३५० पंजीकृत प्रतिनिधियों और १०० प्रमुख विशेषज्ञों के आने की संभावना है। अब तक २१८ प्रतिभागियों ने मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियों के लिए अपने शोध प्रस्तुत किए हैं।

यूपी-यूके माइक्रोकॉन २०२६ के आयोजन सचिव, प्रो. चिन्मय साहू ने सम्मेलन के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “यह सम्मेलन क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी और संक्रामक रोग समुदाय के सभी हितधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।

इसका उद्देश्य हमारे सहयोगात्मक प्रयासों को पुनर्जीवित करना और अगले पीढ़ी के शोधकर्ताओं और माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स को प्रेरित करना है, जो वैश्विक स्वास्थ्य समस्याओं को हल करने में योगदान देंगे।

वहीं संस्थान निदेशक, प्रो. आरके धीमन ने क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि, “क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी ने रोगी देखभाल, संक्रमण नियंत्रण और सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों को मजबूत करने में केंद्रीय भूमिका निभाई है।

यूपी-यूके माइक्रोकॉन २०२६ जैसे सम्मेलन वैज्ञानिक प्रगति को क्लिनिकल और स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ जोड़ने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

साथ ही संस्थान के डीन, प्रो. शालीन कुमार ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मेलन वैज्ञानिक संवाद को बढ़ावा देगा जो अंतरविभागीय दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करेगा और नवाचारों को प्रेरित करेगा जो अंततः बेहतर रोगी परिणामों और सुरक्षित स्वास्थ्य देखभाल प्रथाओं में परिणत होंगे।

उन्होंने कहा सम्मेलन का विषय माइक्रोबायोलॉजी की भूमिका को आधुनिक चिकित्सा का अनिवार्य हिस्सा मानते हुए पूरी तरह से प्रासंगिक है।

यूपी-यूके माइक्रोकॉन २०२६, क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी और संक्रामक रोगों के क्षेत्र में ज्ञान और नवाचार के विस्तार के लिए एक प्रमुख कार्यक्रम है। यह वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है जहां वे शोध साझा कर सकते हैं और संक्रमण विज्ञान में सबसे बड़ी चुनौतियों का समाधान करने के लिए एकजुट हो सकतेहैं।

इंडियन एसोसिएशन ऑफ़ मेडिकल माईक्रोबॉयोलॉजिस्ट्स एक प्रमुख पेशेवर संस्था है जो मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स और शोधकर्ताओं को एकत्र करती है ताकि स्वास्थ्य देखभाल में माइक्रोबायोलॉजी के विकास को बढ़ावा दिया जा सके।

उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड चैप्टर का उद्देश्य दोनों प्रदेशों में चिकित्सा माइक्रोबायोलॉजी के प्रसार को बढ़ावा देना और सहयोग को बढ़ाना है।

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