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डॉ उपाध्याय ने लिवर पूप ऐप विकसित कर नवजात शिशुओं को दी संजीवनी 

आरएमएल निदेशक ने लिवर पूप ऐप का किया उद्घाटन 

 

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। अब नवजात शिशुओं की गंभीर बीमारियों की त्वरित पहचान के लिए एआई जेनरेटेड ऐप विकसित किया गया है।

इससे नवजात शिशुओं की गंभीर बीमारी का आसानी से पहचान की जा सकेगी और शिशुओ की मृत्यु दर को कम करने में संजीवनी माना जा रहा है।

बुधवार को डॉक्टर राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के प्रसिद्ध बाल हेपेटोलॉजिस्ट एवं गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. पीयूष उपाध्याय ने तीन वर्षों के कठिन प्रयास और पिछले डेढ़ वर्ष की गहन लगन मेहनत के बाद भारत का पहला एआई असिस्टेड मोबाइल एप्लिकेशन “लिवर पूप” (LiverPoop) ऐप विकसित किया है। वहीं

इस ऐप का उद्घाटन संस्थान के निदेशक प्रो सीएम सिंह द्वारा किया गया।

इस अवसर पर डॉ. विक्रम सिंह मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, डॉ. अरविंद कुमार सिंह, डॉ. प्रद्युम्न सिंह, डॉ. भुवन चंद्र तिवारी, डॉ. दीप्ति अग्रवाल, डॉ. पीयूष उपाध्याय सहित अन्य संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

डॉ उपाध्याय ने बताया कि अभी यह ऐप वेब पेज से डाउनलोड कर सकते हैं। यह 40 भाषाओं में ऐप बनाया गया है। जिसमें 18 भारतीय और 22 विदेशी भाषाओं में विकसित किया गया है।

उन्होंने कहा कि अभी तक नवजात शिशुओं की बीमारियों की जाँच के लिए स्टूल चार्ट से जाँच की जाती थी, जो यह आसान नहीं हो पाता था।

इस ऐप से बिना खर्च फोटो डाउनलोड करते ही लक्षणों की पहचान हो जाएगी और नवजात शिशु के त्वरित उपचार में सहायक सिद्ध हुआ है। इस भारत में इस ऐप के लिए पेटेंट फाइल कर दिया गया है।

जाने लिवर पूप ऐप के बारे में..

यह ऐप नवजात शिशुओं (0–1 वर्ष) में बिलीरी एट्रेसिया नामक जानलेवा पित्त नली रोग की स्क्रीनिंग करता है। अध्ययन में इसकी सेंसिटिविटी 100 फीसदी पाई गई है।

ऐप नवजात शिशुओं के लिए बना संजीवनी..

बिलीरी एट्रेसिया एक गंभीर बीमारी है। जिसमें 60 दिनों के भीतर ऑपरेशन होने पर बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है। ऐसे में

90 दिनों के बाद लीवर इतना क्षतिग्रस्त हो जाता है कि केवल महंगा लीवर ट्रांसप्लांट या मृत्यु ही विकल्प रह जाता है।

यह ऐप देश दुनिया के लिए बना उपयोगी..

यह ऐप केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरे विकासशील विश्व के लिए उपयोगी है।

22 विदेशी भाषाएँ अरबी, स्पेनिश, फ्रेंच, रूसी, चीनी, जापानी आदि

सार्स , ASEAN और अफ्रीकी देशों में उपयोग योग्य,

प्रवासी श्रमिक भी अपनी भाषा में इसका उपयोग कर सकते हैं।

इस ऐप की प्रमुख विशेषता..

बहुभाषीय सपोर्ट 18 भारतीय + 22 विदेशी भाषाओ से लैस बनाया गया है। इसका उपयोग सिर्फ नवजात शिशु की स्टूल फोटो लें स्क्रीन पर टैप करें और बताएगा “सामान्य” या “खतरे का संकेत मिल जायेगा। इससे

रियल-टाइम डेटा स्वास्थ्य विभाग को तुरंत जानकारी मिल जाएगी। इसमें शून्य खर्च और कोई प्रिंटिंग या वितरण खर्च नहीं लगेगा।

चिकित्सा स्वास्थ्य के क्षेत्र में मिली बड़ी कामयाबी.

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आसानी से उपयोग कर सकती हैं।

समय पर पहचान से लीवर ट्रांसप्लांट की जरूरत में 20 फीसदी तक कमी संभव। इसी क्रम में डॉ. पीयूष उपाध्याय ने बताया

“हमारा उद्देश्य इस बीमारी को जन्म के तुरंत बाद पहचानना है, ताकि कोई भी बच्चा बिना इलाज के न रहे। यह ऐप हर माँ, हर आशा कार्यकर्ता को सशक्त बनाती है। इससे

भारत को अब पेपर स्टूल चार्ट पर करोड़ों खर्च करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। एआई आधारित यह ऐप ही बच्चों के लिए सुनहरा भविष्य का उदय हुआ है। डॉ उपाध्याय ने बताया कि

वेबसाइट (एंड्रॉइड के लिए निःशुल्क डाउनलोड):https://liverpoop.netlify.app/⁠ गूगल प्ले स्टोर एवं एप्पल ऐप स्टोर पर ऐप उपलब्ध है।

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