घर का काम कर लेना स्वस्थ होना जरुरी नहीं- डॉ. सुजाता देव
गर्भावस्था में जाँच के साथ संपूर्ण पोषण जरूरी

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। गर्भावस्था में घर का काम धाम कर लेना स्वस्थ होना जरुरी नहीं है। गर्भावस्था के दौरान जाँच में अनगिनत कमियां मिल जाती है। यह जानकारी गुरुवार को
क्वीन मेरी अस्पताल की वरिष्ठ स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. सुजाता देव ने साझा की। उन्होंने कहा कि
मलिहाबाद निवासी 35 वर्षीय सविता विवाह के आठ साल बाद गर्भवती हुईं। सीएचसी में उनका प्रसव हुआ, लेकिन प्रसव के बाद उन्हें रक्तस्राव (PPH) शुरू हो गया।
सीएचसी में प्रबंधन का प्रयास किया गया, पर रक्तस्राव नियंत्रित न होने पर उन्हें क्वीन मेरी अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के बाद उनकी स्थिति स्थिर हुई।
गर्भावस्था के दौरान एनीमिया और कुपोषण की अनदेखी
विस्तार से पूछताछ में पता चला कि पूरी गर्भावस्था के दौरान सविता का वजन 34 किलो से ऊपर नहीं गया, और उनका अधिकतम हीमोग्लोबिन 10.2 ग्राम/डीएल रहा अर्थात वह पूरी गर्भावस्था एनीमिक और गंभीर रूप से कुपोषित रहीं।
आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने उन्हें पौष्टिक आहार, आयरन-फोलिक एसिड (आईएफए ), विटामिन ‘सी’ और कैल्शियम के सेवन की सलाह दी थी, पर उन्होंने नियमित रूप से दवाएं नहीं लीं। उनका कहना था
“मुझे दवा खाना अच्छा नहीं लगता था और मुझे कोई दिक्कत भी नहीं थी। मैं रोज घर के सभी काम कर लेती थी, इसलिए लगा कि दवा की जरूरत नहीं।
“घर का काम कर पाना स्वस्थ होना जरुरी नहीं – डॉ. सुजाता देव
डॉ. सुजाता देव ने कहा कि स्वस्थ दिखना या घर के काम कर पाना, गर्भावस्था में स्वास्थ्य का भरोसेमंद संकेत नहीं होता। एनीमिया, कुपोषण, संक्रमण और गर्भावस्था से जुड़े कई जोखिम ऐसे होते हैं जो दिखते नहीं, लेकिन बेहद गंभीर होते हैं। इसलिए नियमित जांच, जोखिम की पहचान और समय पर प्रबंधन आवश्यक है।
एनीमिया क्यों बढ़ाता है प्रसवोत्तर रक्तस्राव (PPH) का खतरा
डॉ. सुजाता के अनुसार गर्भावस्था में हीमोग्लोबिन कम होने से अत्यधिक थकान,संक्रमण,समय से पहले प्रसव, खून की कमी बर्दाश्त न कर पाना,
और PPH का खतरा बढ़ जाता है। एनीमिया गर्भाशय की मांसपेशियों की सिकुड़ने की क्षमता को कमजोर करता है, ऑक्सीजन सप्लाई को प्रभावित करता है और रक्त जमने की प्रक्रिया में देरी करता है। परिणामस्वरूप हल्का रक्तस्राव भी गंभीर रूप ले सकता है।
शिशु पर प्रभाव: कम जन्म वजन, हाईपोक्सिया (ऑक्सीजन की कमी) और जन्म के बाद मृत्यु तक का खतरा बढ़ जाता है। सविता जैसी महिलाओं के लिए ‘फोकस्ड केयर’ क्यों जरूरी
सविता का वजन अत्यधिक कम था, जो गंभीर कुपोषण की स्थिति दर्शाता है। ऐसे में जोखिम बढ़ जाते हैं। कम वजन का बच्चा,प्री-टर्म डिलीवरी,संक्रमण की अधिक संभावना होती है।
ऐसी महिलाओं को नियमित ANC (प्रसवपूर्व जांचें)IFA और कैल्शियम का नियमित सेवन,वजन और भ्रूण की निगरानी,जरूरत पड़ने पर उच्च स्तरीय रेफरल जरुरी है।गर्भवती महिलाएं आईएफए क्यों नहीं लेतीं?
डॉ. सुजाता बताती हैं कि आईएफए न लेने के प्रमुख कारण हैं। दवा को लेकर गलतफहमियां,बच्चे को नुकसान पहुंचने का डर,जी मिचलाना, कब्ज जैसी दिक्कतें,परिवार का दबाव,जानकारी की कमी,यह मिथक कि दवा से “गर्मी” होती है,विश्वास कि अधिक दवा से बच्चा बड़ा हो जाएगा या रंग काला हो जाएगा।
यह गलत धारणा कि आसान प्रसव के लिए कम भोजन करना चाहिए। ये मिथक गर्भावस्था को जोखिमपूर्ण बना देते हैं।
स्वास्थ्य तंत्र की भूमिका: काउंसलिंग ही सबसे बड़ा हथियार सविता जैसे मामलों में स्वास्थ्य प्रणाली की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जानें आवश्यक कदम..
व्यक्तिगत काउंसलिंग,दवाओं और आहार से जुड़े मिथकों पर विस्तार से बात,परिवार को काउंसलिंग में शामिल करना,सप्लीमेंट्स के साइड इफेक्ट्स के बारे में सही जानकारी,जोखिम की स्थिति पर समय रहते रेफरल,समुदाय में ले जाने योग्य मुख्य संदेश,
नियमित प्रसवपूर्व जांचें (ANC),आयरन, फोलिक एसिड और कैल्शियम का महत्व, संतुलित एवं पौष्टिक आहार,दवाओं और आहार से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना,गर्भवती के प्रति परिवार का सहयोग, गर्भावस्था के खतरे के लक्षणों की पहचान, सुरक्षित और संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करना चाहिए।



