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सूक्ष्मजीव विज्ञान के बदलते स्वरूप, प्रारूप पर सीएमई 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सूक्ष्म जीव विज्ञान पर किया विचार विमर्श 

 

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। डॉक्टर ने सूक्ष्म जीव विज्ञान पर विचार विमर्श किया। मंगलवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा कार्यशाला आयोजित की गई।

जिसमें मुख्य अतिथि संस्थान निदेशक प्रो. सीएम सिंह एवं प्रो. ज्योत्स्ना अग्रवाल, माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम की आयोजक अध्यक्ष ने सभी प्रतिभागियों का सीएमई में स्वागत किया।

मुख्य वक्ता प्रो. विमला वेंकटेश, प्रमुख, सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग, केजीएमयू शामिल रही । एक विख्यात वक्ता और सूक्ष्मजीव विज्ञान विशेषज्ञ, प्रो. विमला वेंकटेश ने सूक्ष्मजीव विज्ञान के बदलते स्वरूप और प्रारूप, एवं भविष्य के लिए माइक्रोबायोलॉजी के शिक्षार्थियों को सशक्त बनाने के विषय पर बातचीत की।

उन्होंने कहा कि परंपरागत रूप से प्रयोगशालाओं में माइक्रोस्कोप के पीछे काम करने वाले सूक्ष्मजीवविज्ञानी अब अस्पतालों में संक्रमण रोकथाम और नियंत्रण पहलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और संक्रमण रोगों से लड़ने के लिए नैदानिक और प्रशासनिक रणनीतियों में प्रमुख निर्णयकर्ता बन गए हैं।

प्रो. सीएम सिंह ने माइक्रोबायोलॉजी विभाग के समाचार पत्र का 13वां संस्करण भी जारी किया, जो विभिन्न नैदानिक नमूनों से अलग किए गए सूक्ष्मजीवों की जानकारी और अस्पताल में देखे गए एंटीबायोटिक प्रतिरोध पैटर्न के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है।

सीएमई में नियमित प्रैक्टिस में पाए जाने वाले दिलचस्प संक्रामक रोग मामलों पर एक महत्वपूर्ण पैनल चर्चा भी हुई। प्रमुख पैनलिस्ट प्रो. अनुपम दास, डॉ. एसएस नाथ, डॉ. ऋतु कारोली और डॉ. दीप्ति अग्रवाल, प्रो. हिमांशु रेड्डी (KGMU) ने नियमित चिकित्सा में निदान और उपचार संबंधी दुविधाओं पर विचार-विमर्श किया।

उनके व्यापक व्यक्तिगत अनुभव और विविध दृष्टिकोण ने प्रभावी रोगी प्रबंधन के लिए विशेषज्ञ सुझाव और बहुमूल्य ज्ञान प्रदान किया। कार्यक्रम के अंत में आयोजक सचिव- प्रो. मनोदीप सेन ने मंचासीन अतिथि शिक्षक,छात्रों एवं उपस्थित लोगों का धन्यवाद और आभार प्रकट किया।

सीएमई के बाद माइक्रोबायोलॉजी विभाग की पहली पूर्व छात्र एलुमनी बैठक “माइक्रोब मिंगल” आयोजित की गई। इस एलुमनी बैठक में पूर्व बैचों के विभिन्न छात्रों और सीनियर रेजिडेंट्स का पुनर्मिलन हुआ।

डॉ. सना इस्लाही, सह-प्रोफेसर, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, एम्स राएबरेली ने अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा करते हुए व्याख्यान दिया।

यह एलुमनी बैठक सभी पूर्व स्नातकोत्तर छात्रों और सीनियर रेज़िडेंट्स के लिए एक भावपूर्ण मिलन था। जिसमें उन्होंने अपने आल्मा मेटर की पुरानी हंसी-खुशी भरी यादों को ताज़ा किया।

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