फ़ाइलेरिया उन्मूलन को घर- घर दवा खिलाने का चलाया अभियान
30 फीसदी लोगों को फाइलेरिया रोधी दवाओं का कराया सेवन

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। फाइलेरिया उन्मूलन अभियान में अब तक 30 फ़ीसदी लोगों को दवा खिलाई जा चुकी है।
राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद के माल ब्लॉक में सर्वजन दवा सेवन अभियान (एमडीए) संचालित किया जा रहा है। अभियान के तहत आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर पात्र आबादी को फाइलेरिया रोधी दवाओं में आइवरमेक्टिन, डाईइथाइल कार्बामाजीन एवं एल्बेंडाजोल (आईडीए) का सेवन करा रही हैं। बुधवार को
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि इस अभियान के तहत छह कार्य दिवसों में अब तक ब्लॉक में 65,276 अर्थात लगभग 30 प्रतिशत लोगों द्वारा फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन किया जा चुका है।
जबकि लक्षित जनसंख्या 2.21 लाख है। 10 फरवरी से प्रारंभ हुआ यह अभियान 28 फरवरी तक संचालित किया जाएगा। अभियान में पंचायती राज, शिक्षा, खाद्य एवं रसद तथा आईसीडीएस विभाग सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं।
फाइलेरिया एक गंभीर, किन्तु पूर्णतः रोके जा सकने वाला रोग है, जिससे समय रहते दवा सेवन के माध्यम से स्थायी दिव्यांगता से बचाव संभव है। ऐसे में स्वयं को स्वस्थ समझकर दवा सेवन से इंकार करना उचित नहीं है। वहीं
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. रितु श्रीवास्तव ने बताया कि अभियान के अभियान के सफल संचालन हेतु 172 टीमें एवं 34 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन, पाथ, सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफॉर) एवं प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल (पीसीआई) का भी सहयोग प्राप्त हो रहा है।
बुधवार एवं शनिवार को नियमित टीकाकरण सत्र आयोजित होने के कारण इन दिनों अभियान संचालित नहीं किया गया। सीएचसी अधीक्षक डॉ. जेपी सिंह ने बताया कि कुछ व्यक्तियों में दवा सेवन के पश्चात हल्के दुष्प्रभाव देखे गए, जिनका त्वरित प्रबंधन आरआरटी टीम द्वारा किया गया।
हमारा प्रयास है कि 90 फीसद पात्र लाभार्थी दवा का सेवन कर लें जिससे कि फाइलेरिया का संक्रमण तोड़ा जा सके । स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी राजेश कुमार पांडे ने बताया कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता अपने सामने ही दवा का सेवन कराना सुनिश्चित कर रहे हैं । दवा लोगों को खाने के लिए नहीं दी जा रही है ।
माल ब्लॉक के ढकवा गाँव की सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी(सीएचओ ) प्रीति ने बताया कि अभियान में फाइलेरिया रोगी भी सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं। गाँव के दो परिवारों के सात सदस्य स्वयं को स्वस्थ बताते हुए दवा सेवन से इंकार कर रहे थे।
इस दौरान आशा कार्यकर्ता फाइलेरिया से पीड़ित सावित्री को साथ लेकर उन परिवारों के घर पहुँचीं। सावित्री ने अपने रोग के कारण हुई शारीरिक परेशानी एवं दैनिक जीवन में आने वाली कठिनाइयों को साझा करते हुए समय रहते दवा सेवन के महत्व को समझाया। उनकी आपबीती सुनकर परिवार के सभी सदस्यों ने दवा का सेवन किया।
मंगलवार तक गाँव की लगभग 34 प्रतिशत पात्र जनसंख्या द्वारा दवा का सेवन किया जा चुका था।
नारायणपुर की सीएचओ नेहा सिंह ने बताया कि उनके क्षेत्र में कोटेदार संगीता द्वारा अपनी दुकान पर आने वाले लोगों को दवा सेवन के लिए प्रेरित किया गया और दवा सेवन कराया गया ।
आशा कार्यकर्ता सुनीता यादव ने बताया कि इस बार के अभियान में पूर्व अभियानों की तुलना में दवा सेवन को लेकर लोगों में अधिक जागरूकता देखी जा रही है। इसका प्रमुख कारण अभियान से 2–3 माह पूर्व से आयोजित सीएचओ-पीएसपी(पेशेंट स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म) बैठकों को माना जा रहा है।
जिनमें फाइलेरिया रोगी, एएनएम, कोटेदार, समूह सखी एवं ग्राम प्रधान सहित विभिन्न समुदाय प्रतिनिधियों ने सहभागिता की थी। बैठकों के माध्यम से लोगों को दवा सेवन के लाभों के बारे में जानकारी दी गई थी। वर्तमान में भी जब कोई व्यक्ति दवा सेवन से इंकार करता है, तो फाइलेरिया रोगी आशा कार्यकर्ताओं के साथ जाकर अपनी आपबीती साझा करते हैं और लोगों को दवा सेवन के लिए प्रेरित करते हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी का मानना है कि सामुदायिक सहयोग एवं रोगियों की सक्रिय सहभागिता से अभियान की सफलता सुनिश्चित की जा सकती है तथा जनपद को फाइलेरिया मुक्त बनाने के लक्ष्य को समय से पूर्व प्राप्त किया जा सकता है।



