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एनबीआरआई में 7वां अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

देश दुनिया के वैज्ञानिक होंगे शामिल, पर्यावरण सुधार पर होगा गहन मंथन

 

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी में देश दुनिया के वैज्ञानिकों का जमावड़ा होने जा रहा है। जिसमें बढ़ते वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन विषय पर वैज्ञानिक गहन मंथन करेंगे।

यह जानकारी शनिवार को एनबीआरआई में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान संस्थान निदेशक डॉक्टर एके शासनी ने दी। उन्होंने बताया कि भारत में प्रति व्यक्ति 28 पेड़ों का औसत निकल रहा है।

जबकि अन्य देशों में इससे कहीं अधिक रिकॉर्ड मिलता है। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन सभी को जरुरत है, इसके लिए हमें पर्यावरण को बचाने के लिए जागरूक होना होगा। डॉ शासनी ने बताया कि

वनस्पति एवं पर्यावरण प्रदूषण पर 7वां अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय सोसायटी ऑफ एनवायरनमेंटल बोटनिस्ट्स और सीएसआईआर -राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में 30 नवंबर से 2 दिसंबर तक संस्थान परिसर में आयोजित किया जा रहा है।

सम्मेलन का मुख्य विषय है, “पौधे एवं पारिस्थितिक तंत्र है। पर्यावरण के लिए जीवनशैली, हरित विकास एवं सतत भविष्य की ओर बढ़ना है।

निदेशक डॉ. एके शासनी ने बताया कि सम्मेलन में भारत एवं विदेशों से वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, उद्योग विशेषज्ञों, सरकारी प्रतिनिधियों तथा छात्रों सहित 300 से अधिक प्रतिभागियों की उपस्थिति अपेक्षित है।

विशेष रूप से, बांग्लादेश एवं यूरोपीय देशों से 50 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि सम्मेलन में शामिल होंगे। जिससे इस वैज्ञानिक मंच को वैश्विक दृष्टिकोण प्राप्त होगा।

सम्मेलन की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक एवं पर्यावरणीय संस्थाओं की भागीदारी भी होगी। इनमें इंटरनेशनल यूनियन ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज जैसी संस्थाएँ शामिल हैं। जिनका प्रतिनिधित्व अंतरराष्ट्रीय सलाहकार समिति के सदस्य, डॉ. नाथाली फॉमप्रोइक्स (फ्रांस) जैसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक करेंगे।

सम्मेलन के दौरान प्रमुख गतिविधियों में..

>> प्रख्यात राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के मुख्य व्याख्यान

>> तकनीकी सत्रों में मौखिक शोध प्रस्तुतियाँ

>> शोध छात्रों एवं युवा वैज्ञानिकों के पोस्टर प्रेजेंटेशन

>> पैनल एवं प्लेनरी चर्चाएँ

 >>चर्चा, सहयोग एवं नेटवर्किंग के मंच

वैज्ञानिक विचार विमर्श निम्न प्रमुख विषयक क्षेत्रों पर केंद्रित होंगे।

 >> जैव विविधता एवं संकटग्रस्त प्रजातियों का संरक्षण

>> जलवायु परिवर्तन के प्रभाव एवं अनुकूलन रणनीतियाँ

 >> पर्यावरणीय प्रदूषण के प्रति पौधों की प्रतिक्रियाएँ

>> पर्यावरणीय सूक्ष्मजीव विज्ञान, जैवप्रौद्योगिकी एवं नैनोप्रौद्योगिकी

 >> पर्यावरणीय निगरानी, मूल्यांकन एवं प्रदूषण शमन।

 >> शहरी पारिस्थितिकी एवं हरित अवसंरचना

>> पारिस्थितिक संरक्षण हेतु भू-स्थानिक तकनीक।

 >> हरित प्रौद्योगिकियाँ, जैव–अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास।

 >> पोषण सुरक्षा एवं पारंपरिक वनस्पति ज्ञान

 >> सूक्ष्मप्लास्टिक जैसे उभरते प्रदूषण कारक

सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय तनाव एवं प्रदूषण विश्वभर में पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित कर रहे हैं।

ICPEP-7 का उद्देश्य केवल चुनौतियों पर चर्चा करना नहीं, बल्कि सहयोगात्मक समाधान, भावी रणनीतियाँ और वैज्ञानिक कार्ययोजनाएँ विकसित करना है, जो पर्यावरण संरक्षण में सार्थक योगदान प्रदान करें।

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