गोमती नदी में जल्द दौड़ेगी वाटर मैट्रो, तैयारी शुरू
परिवहन मंत्री ने निदेशक कोच्चि मेट्रो के साथ की बैठक

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी स्थित गोमती नदी में जल्द मेट्रो चलाने की तैयारी शुरू हो गई है।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री उप्र के ड्रीम प्रोजेक्ट जल परिवहन के संबंध में उप्र के परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह के सरकारी आवास पर कोच्चि मैट्रो के निदेशक संजय कुमार से साथ बैठक की।
परिवहन राज्य मंत्री गोमती ने नदी में वाटर मैट्रों के संचालन पर विचार विमर्श किया। बैठक में गोमती नदी में वाटर मैट्रो चलाने में क्या संभावनाएं हैं, इसकी तकनीकी व्यवहारिकता अध्ययन संबंधी रिपोर्ट निदेशक संजय कुमार ने प्रस्तुत की।
परिवहन मंत्री ने बताया कि उप्र के तीन महत्वपूर्ण स्थानों की तकनीकी व्यवहारिकता अध्ययन रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। लखनऊ के गोमती नदी में वाटर मैट्रो के संचालन के लिए कार्रवाई चल रही है।
इसके बाद मथुरा में यमुना नदी में आगरा से मथुरा तक, गोरखपुर में रामगढ़ ताल, बलिया में सुरहा ताल एवं गंगा नदी में संचालन की कार्रवाई को आगे बढ़ाया जायेगा। उन्होंने बताया कि यहां की जनता को सुविधाएं प्राप्त होगी। साथ ही पर्यटन की दृष्टि से एवं आर्थिक उपार्जन की दृष्टि से उपयोगी होगा। जल परिवहन का विकास जनता के मनोरंजन की दृष्टि से भी बहुत उपयोगी होगा।
परिवहन मंत्री ने बताया कि सर्वप्रथम नेवीगेशनल एड की कार्यवाही होगी। इन्टीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेन्ट सिस्टम, पैसेंजर काउन्टिंग सिस्टम, पर्यावरणीय व्यवस्था, सोशल इंपैक्ट स्टडी, टर्मिनल, जेट्टी, रोड कनेक्टिविटी पोन्टुन,
आटोमेटिक फेयर कलेक्शन (एएफसी), इलेक्ट्रिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर (11 केवी हाईटेंशन लाईट), वोट चार्जर, हायर प्रोटेक्शन सिस्टम, एचवीएसी के अध्ययन के उपरान्त एक डीपीआर तैयार होती है।
उसके बाद अनुमानित लागत का निर्धारण करने के पश्चात सरकार या प्राधिकरण अलग-अलग कार्यों हेतु निविदा का आमंत्रण करेगी। निविदा आमंत्रण के पश्चात चयन की कार्रवाई की जायेगी। जिससे कि उक्त परियोजना को धरातल पर लाया जा सके।
परिवहन मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये कि इस संबंध में जो भी आवश्यक कार्रवाई है, उसमें तेजी लाई जाए। जिससे कि मुख्यमंत्री के उक्त ड्रीम प्रोजेक्ट पर कार्रवाई तेज हो सके।
जिसका लाभ जनता को यथाशीघ्र प्राप्त हो सके। उन्होंने निर्देश दिये कि परियोजना से संबंधित होने वाले व्यय का विवरण उपलब्ध कराये, जिससे शासन से बजट आवंटन की व्यवस्था कराई जा सके।



