भारत में करीब 63 लाख लोग श्रवण हानि से पीड़ित – प्रो आरके धीमन
कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यशाला में 20 सर्जनों ने टेम्पोरल बोन का किया विच्छेदन

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यशाला में 20 सर्जनों ने टेम्पोरल बोन का विच्छेदन किया। रविवार को
एसजीपीजीआई के हेड और नैक सर्जरी विभाग ने विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अमित केशरी के नेतृत्व में 24 और 25 जनवरी को प्रथम कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यशाला का आयोजित की।
जिसका उद्देश्य प्रतिभागियों को कौशल संवर्धन के लिए टेम्पोरल बोन विच्छेदन (टेम्पोरल बोन डिसेक्शन) का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था। विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों के 20 सर्जनों ने टेम्पोरल बोन का विच्छेदन किया, जो शल्य चिकित्सा कौशल को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
साथ ही रोबोटिक 3डी डिजिटल माइक्रोस्कोप का उपयोग करके विच्छेदन का प्रदर्शन था, जो भारत में अपनी तरह का पहला आयोजन माना जा रहा है।
वहीं संस्थान निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर आरके धीमन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर सम्बोधित करते हुए कहा कि भारत में लगभग 63 लाख लोग श्रवण हानि से पीड़ित हैं।
जिससे यह एक गंभीर जन स्वास्थ्य समस्या बन गई है। कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी इन लोगों को नया जीवन प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि राज्य भर के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों में कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यक्रम शुरू करने की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह संस्थान उत्तर प्रदेश राज्य में कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यक्रम को मजबूत करने के लिए इन संस्थानों को मार्गदर्शन और प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए तत्पर है। उन्होंने बताया कि संस्थान प्रशासन उत्तर प्रदेश में बच्चों में श्रवण हानि की इस गंभीर समस्या के लिए क्षमता निर्माण के लिए सभी आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के समन्वय से नवजात शिशुओं की श्रवण क्षमता की व्यापक जांच और शीघ्र निदान एवं श्रवण पुनर्वास की आवश्यकता पर बल दिया। इसी क्रम में
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. देवेंद्र गुप्ता ने विभाग द्वारा किए जा रहे अथक प्रयासों की सराहना करते हुए संस्थान में कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यक्रम को और मजबूत बनाने के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की।
प्रो. अमित केशरी ने कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यक्रम शुरू करने से जुड़ी तकनीकी बारीकियों और इससे व्यक्तियों के जीवन पर पड़ने वाले व्यापक प्रभाव का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि संस्थान के हेड व नैक सर्जरी विभाग में बच्चों और वयस्कों दोनों पर नियमित रूप से कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की जा रही है।
इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वरिष्ठ अनुभवी संकाय सदस्य अपने बहुमूल्य सुझाव देने के लिए उपस्थित थे।
कार्यशाला में सर्जनों, ऑडियोलॉजिस्टों और पुनर्वास विशेषज्ञों के व्याख्यान भी शामिल किया गया। जिन्होंने कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के विभिन्न पहलुओं का व्यापक जानकारी प्रदान की।



