अंगदान से तीन जिंदगियों की जागी उम्मीद
मरीज के परिजनों ने अंगदान की जताई सहमति

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। मरीज के परिजनों ने अंगदान करने की सहमति देकर प्रेरणादायक कार्य किया है। रविवार को
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में मानवता और परोपकार की प्रेरणादायक मिसाल पेश की गयी। बाराबंकी निवासी मरीज मनोज कुमार को 25 अगस्त उपचार के लिए संस्थान में भर्ती कराया गया था।
डॉक्टरों अथक चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद स्वास्थ्य स्थिति में कोई सुधार नहीं हो सका। जहाँ उन्हें इमरजेंसी ईसीयू में डॉ एसएस नाथ के निर्देशन में उपचार प्रदान किया जा रहा था।
उपचार के दौरान निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया एवं प्रोटोकॉल के अनुसार संस्थान की ब्रेन स्टेम डेथ सर्टिफिकेशन टीम द्वारा “मनोज कुमार” को ब्रेन स्टेम डेड प्रमाणित किया गया।
इस टीम में डॉ पीके मौर्या,डॉ ऋतु करौली, डॉ एसएस नाथ एवं डॉ अरविंदव कुमार सिंह शामिल रहे। वहीं
ब्रेन स्टेम डेथ प्रमाणित होने के बाद परिजनों को अंगदान के महत्व एवं प्रक्रिया के संबंध में संवेदनशीलता के साथ काउंसलिंग प्रदान की गई।
इस महत्वपूर्ण काउंसलिंग प्रक्रिया में ग्रीफ काउंसलर सुभाष शुक्ला एवं ट्रांसप्लांट कॉर्डिनेटर बर्नाडिक्ट मिंज,ने डॉ संदीप कुमार यादव एवं डॉ एसएस नाथ के सहयोग एवं मार्गदर्शन में परिजनों से संवाद किया।
परिवार को अंगदान की प्रक्रिया, उसके महत्व तथा इससे जरूरतमंद मरीजों को मिलने वाले जीवन के अवसर के बारे में जानकारी दी गई।
अपने प्रियजन को खोने की इस अत्यंत कठिन एवं भावनात्मक घड़ी में परिवार ने असाधारण साहस और मानवता का परिचय देते हुए अंगदान की सहमति प्रदान की। परिवार के इस महान निर्णय से तीन जरूरतमंद मरीजों के जीवन में नई उम्मीद जगी।
अंगदान की सहमति के बाद ऑर्गन रिट्रीवल प्रोसेस को सुचारु, सुरक्षित एवं समयबद्ध तरीके से संपन्न कराने में संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ अरविंद कुमार सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
यूरोलॉजी विभाग की ओर से डॉ ईश्वर राम धयाल, डॉ आलोक श्रीवास्तव , डॉ संजीत सिंह, निश्चेतना विभाग के डॉ पीके दास, डॉ निधि शुक्ला के साथ मिलकर निर्धारित समय के अनुसार ऑर्गन रिट्रीवल प्रोसेस को सफलतापूर्वक कराने में भूमिका निभाई ।
साथ ही नेफ्रोलॉजी टीम की ओर से डॉ अभिलाष चंद्रा, डॉ नम्रता राव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कैडेवरिक डोनर के आवश्यक वर्कअप, ऑर्गन की उपयुक्तता के आकलन तथा संभावित रिसीपिएंट्स के वर्कअप एवं तैयारी को समयबद्ध तरीके से पूरा कराया।
जिससे उपलब्ध अंगों का उचित एवं समय पर उपयोग सुनिश्चित हो सका। फारेंसिक विभाग की ओर से डॉ प्रदीप एवं डॉ आलोक ने आवश्यक फॉरेंसिक औपचारिकताओं एवं प्रक्रिया को समयानुसार पूरा कराने में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
अंगदान एवं ऑर्गन रिट्रीवल प्रोसेस के दौरान आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक औपचारिकताओं को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने में हेड कांस्टेबल कमलेश यादव एवं विवेक यादव ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके सहयोग से आवश्यक कानूनी प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा किया गया।
इस प्रकार सब के आपसी समन्वय और तत्परता से ऑर्गन रिट्रीवल प्रोसेस को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सका।
यह पूरी प्रक्रिया संस्थान निदेशक प्रो सीएम सिंह एवं मुख्य चिकित्सा अध्यक्ष डॉ विक्रम सिंह के मार्गदर्शन में किया गया। मनोज कुमार के परिवार का यह निर्णय अत्यंत कठिन परिस्थिति में मानवता की अनुकरणीय मिसाल पेश की है।
एक परिवार के दुःख की इस घड़ी में लिया गया उनका निर्णय तीन अन्य मरीजों और उनके परिवारों के लिए आशा की किरण बन गया।
उनके परिवारजन संतोष मिश्रा एवं लक्ष्मण तिवारी ने भावुक होकर कहा कि अंगदान जैसे पुण्य कर्म से निश्चित रूप से उनकी आत्मा को शांति मिलेगी और यह निर्णय समाज के अन्य लोगों को भी अंगदान के लिए प्रेरित करेगा। कहा कि जाते-जाते भी उन्होंने कई लोगों का जीवन संवारने का महान कार्य किया।
इसके लिए संस्थान परिवार ने अंगदाता मनोज कुमार को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिजनों के इस साहसिक एवं मानवीय निर्णय के प्रति सम्मान व्यक्त किया।



