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 भारत जैव विविधता से परिपूर्ण राष्ट्र – अवनीश अवस्थी

 एनबीआरआई में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ समापन

 

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी स्थित एनबीआरआई में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन किया गया।

मंगलवार को राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (CSIR–NBRI) में चल रहे पादप एवं पर्यावरण प्रदूषण पर 7वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सम्पन्न हुआ।

समापन समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सलाहकार एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अवनीश कुमार अवस्थी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

वहीं सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए सीएसआईआर-एनबीआरआई के निदेशक डॉ. एके शासनी ने कहा कि इस सम्मेलन के निष्कर्ष संस्थान में भविष्य के अनुसंधान और तकनीकी विकास का मार्गदर्शन करेंगे।

उन्होंने कहा “हमारा कार्य इस सम्मेलन के साथ समाप्त नहीं होता बल्कि यहीं से आगे बढ़ता है, जहाँ हम सहयोगात्मक शोध, नवाचार-आधारित परियोजनाओं और वैज्ञानिक संरक्षण के प्रयासों को नई गति प्रदान करेंगे।

साथ ही अवनीश कुमार अवस्थी ने पर्यावरण संरक्षण और जनहित में पौध-आधारित रणनीतियों को आकार देने में सम्मेलन की महत्वपूर्ण भूमिका की प्रशंसा की और वैज्ञानिक अनुसंधान से प्राप्त ज्ञान को नीति-निर्माण में अधिक समाहित करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि भारत जैव विविधता से परिपूर्ण राष्ट्र है, जहाँ विविध जलवायु परिस्थितियाँ हमारे प्राकृतिक संसाधनों को समृद्ध बनाती हैं। जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण प्रदूषण पर किए गए शोध की सराहना करते हुए उन्होंने जलीय प्रदूषण, उसमें खरपतवार की भूमिका तथा उसके नियंत्रण एवं उन्मूलन पर और अधिक वैज्ञानिक अनुसंधान की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने यह भी अवगत कराया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले पाँच वर्षों में प्रदेश में 2 अरब से अधिक पौधे लगाए गए, जो पूरे भारत में किए गए कुल पौधरोपण का लगभग एक-तिहाई है। यह उत्तर प्रदेश की हरित प्रतिबद्धता का अद्वितीय उदाहरण है। इसी क्रम में

आईसीपीईपी–7 में आयोजित पोस्टर सत्रों में देशभर से छात्रों, शोधकर्ताओं, युवा वैज्ञानिकों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। जिन्होंने पर्यावरणीय शोध पर नवाचारी प्रस्तुतियाँ दीं। समापन समारोह के दौरान प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया।

जिसमें पोस्टर सत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र मुंबई के एम. पांडेय एवं नेगी पी, एनबीआरआई लखनऊ की अदिति पाठक, दिशा मैत्रा, एकता गुप्ता, तुषार अनिलराव लोहित, हिमांशु शर्मा, वासिम सिद्दीकी, जसबीर कौर तथा

मरिया नसीम, वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया देहरादून की अनिषा गांगुली, सीमैप, लखनऊ की दिशा मिश्रा और नाज़िया सैयद, एनआईओ, गोवा की वितस्ता जाड, नॉर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी शिलांग की स्तुति जैन, डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय की

मेघना जायसवाल, बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज पिलानी की शैली चौहान, इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रयागराज की नेत्रा केशरवानी, शेर-ए-बंगला कृषि विश्वविद्यालय ढाका की दिपान्विता दत्ता,सीडीआरआई लखनऊ की रोसनी कुमारी शॉ, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर के

अंकुश तिवारी, थापर इंस्टीट्यूट पंजाब के विवेक वर्मा, मैंगलोर विश्वविद्यालय की सोम्या, तथा सीमैप की ज्योति शामिल रही।

इस अवसर पर डॉ. यूसी लवानिया, एमेरिटस वैज्ञानिक को इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एनवायरनमेंटल बॉटनिस्ट्स (आईएसईबी) के द्वारा मानद फेलोशिप प्रदान की गई।

डॉ. विवेक पांडेय, उपाध्यक्ष आईएसईबी एवं आयोजन सचिव ने सम्मेलन की रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा अंत में डॉ. सौमित के. बेहरा, सचिव आईएसईबी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

इससे पूर्व सम्मेलन के तीसरे एवं अंतिम दिन में आयोजित विभिन्न सत्रों में जलवायु सहनशीलता अनुसंधान, पारिस्थितिकी संरक्षण और सतत पादप विज्ञान पर चर्चाएँ केंद्रित रहीं। एक तकनीकी सत्र में प्रो. बिस्वजीत प्रधान (यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी, सिडनी), प्रो. मुकुंद देव बेहरा (IIT खड़गपुर),

प्रो. अजय शर्मा (ऑबर्न यूनिवर्सिटी, यूएसए) और डॉ. देबाशिष चक्रवर्ती (CSIR–NBRI) द्वारा विविध सामयिक विषयों पर व्याख्यान प्रस्तुत किए गए।

दोपहर में आयोजित एक अन्य तकनीकी सत्र में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, लोक वनस्पति विज्ञान और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव में पुष्पकृषि जैसे विषयों पर चर्चा और डॉ. दलीप कुमार उप्रेती ने भारतीय लाईकेंस के औषधीय महत्व पर विशेष व्याख्यान दिया।

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