शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनः स्थापित करने की आवश्यकता
हिन्दुत्व की शाश्वत प्रासंगिकता" विषयक राष्ट्रीय सम्मेलन

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी में शिक्षा के साथ ज्ञान और संस्कार विषय पर जानकारी साझा की गयी।
मंगलवार को विश्व हिन्दू परिषद के आयाम विश्व हिन्दू अकादमिक संगठन द्वारा लखनऊ विश्वविद्यालय के सहयोग से “द इंटरनल रिलेवन्स ऑफ़ हिंदुत्व: रिवाइविंग कल्चरल कंस्यूशियसनेस एंड ट्रांसफार्मेशन” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन मालवीय सभागार में किया गया। जिसमें प्राध्यापक एवं शिक्षाविद् उपस्थित रहे।
सम्मेलन का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, पुष्पांजलि एवं वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक आरंभ किया गया। वहीं
वाहा के राष्ट्रीय समन्वयक प्रो. नचिकेता तिवारी ने संगठन की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि “गुरुकुल परंपरा में ज्ञान और संस्कार साथ-साथ दिए जाते थे। आज उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनः स्थापित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वविद्यालयों में भारतीय दर्शन आधारित शोध को प्रोत्साहित करने के उदाहरण प्रस्तुत किए।
विशिष्ट अतिथि गजेन्द्र , जोनल ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी, लखनऊ जोन, विश्व हिन्दू परिषद ने कहा कि “योग, संस्कृत और भारतीय पर्वों के प्रति युवाओं की बढ़ती रुचि यह प्रमाण है कि सांस्कृतिक चेतना स्वतः समाज में पुनर्जीवित हो रही है।
मुख्य वक्ता प्रो. संजीव कुमार शर्मा, पूर्व कुलपति, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय जीवन-दृष्टि सत्य, अहिंसा, करुणा और कर्तव्यबोध जैसे मूल्यों पर आधारित है।
मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने काशी, अयोध्या और मथुरा के सांस्कृतिक पुनरुद्धार का उदाहरण देते हुए कहा कि “सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण से न केवल आस्था, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी बल मिला है।
राष्ट्रीय गान, प्रमाण-पत्र वितरण के साथ सम्मेलन का समापन हुआ।



