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एआई का प्रभावी उपयोग रोगों की रोकथाम में होना चाहिए – प्रो सीएम सिंह

स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विषय पर चर्चा

 

लखनऊ भारत प्रकाश न्यूज़। स्वास्थ्य सेवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का हिस्सा बनाने की मुहिम तेज हो गई है। मंगलवार को डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका” विषय पर पैनल चर्चा की गयी।

वहीं संस्थान निदेशक प्रो.सीएम सिंह ने ए आई की विशेषता बताते हुए कहा कि कहा कि एआई की उपयोगिता केवल अस्पतालों, जांच मशीनों, स्कैनिंग या उपचार तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसका सबसे प्रभावी उपयोग रोगों की रोकथाम (Prevention) में होना चाहिए।

उन्होंने विशेष रूप से प्राइमॉर्डियल प्रिवेंशन तथा प्राइमरी प्रिवेंशन पर जोर देते हुए कहा कि एआई को स्कूल जाने वाले बच्चों, युवाओं और समाज के व्यापक स्तर पर स्वास्थ्य संरक्षण के लिए उपयोग में लाया जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि एआई की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि यह जोखिम को समय रहते पहचान सकता है। उन्होंने कहा कि सही जीवनशैली अपनाने में मार्गदर्शन कर सकता है और बीमारी शुरू होने से पहले ही उसे रोकने में मदद कर सकता है।

इससे स्वास्थ्य व्यवस्था “इलाज-आधारित मॉडल” से आगे बढ़कर “रोकथाम-आधारित मॉडल” की ओर मजबूत कदम बढ़ा सकेगी।

एआई के माध्यम से प्राइमॉर्डियल प्रिवेंशन स्कूली बच्चों पर फोकस..

प्रो.सीएम सिंह ने कहा कि आज उच्च रक्तचाप, मोटापा, मधुमेह, हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी बीमारियां कम उम्र में ही बढ़ रही हैं। इसलिए एआई का उपयोग प्राइमॉर्डियल प्रिवेंशन के लिए होना चाहिए। जिसका अर्थ है विशेषकर बच्चों में जोखिम कारकों के विकसित होने से पहले ही उनकी रोकथाम करना।

उन्होंने बताया कि एआई आधारित प्लेटफॉर्म और डिजिटल टूल्स के माध्यम से बच्चों में गलत जीवनशैली जैसे जंक फूड, स्क्रीन टाइम, कम शारीरिक गतिविधि आदि को समय रहते पहचाना जा सकता है। उम्र और जरूरत के अनुसार व्यक्तिगत स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान की जा सकती है।

स्कूल स्तर पर नैतिकता व गोपनीयता का ध्यान रखते हुए फिटनेस संकेतकों की ट्रेंडिंग देखी जा सकती है। बच्चों को प्रेरित करने हेतु गेमिफाइड फिटनेस प्रोग्राम (चलना, खेलना, व्यायाम) अपनाए जा सकते हैं।

बच्चों और अभिभावकों के लिए एआई आधारित हेल्थ असिस्टेंट से सही जानकारी को बढ़ावा दिया जा सकता है और भ्रम,अफवाह से बचाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि बचपन में बनी अच्छी आदतें जीवनभर सुरक्षा देती हैं, और एआई इस दिशा में एक प्रभावी माध्यम बन सकता है।

एआई के माध्यम से प्राइमरी प्रिवेंशन (युवा एवं समाज पर फोकस..

>> हृदय रोग, स्ट्रोक, मधुमेह या उच्च रक्तचाप के लिए जोखिम अनुमान (Risk Prediction) एवं रिस्क स्कोरिंग मॉडल तैयार करना

>> समुदाय स्तर पर डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से स्क्रीनिंग प्रोग्राम को मजबूत करना

>> नियमित बीपी/शुगर जांच, व्यायाम लक्ष्य और दवा अनुपालन के लिए स्मार्ट रिमाइंडर एवं अलर्ट सिस्टम

>> धूम्रपान छोड़ने, स्वस्थ आहार, तनाव नियंत्रण और अच्छी नींद के लिए AI आधारित परामर्श सहायता

>> अलग-अलग समूहों (छात्र, कामकाजी लोग, महिलाएं, वृद्ध, उच्च जोखिम परिवार) के लिए लक्षित स्वास्थ्य संदेश तैयार करना, ताकि संदेश अधिक प्रभावी हो सके।

उन्होंने कहा कि एआई स्वास्थ्य सेवाओं को अस्पतालों से बाहर निकालकर समुदाय और घर तक जोड़ने में मदद करेगा, जिससे टेली-कंसल्टेशन, डिजिटल आउटरीच और रेफरल सिस्टम अधिक बेहतर हो सकेंगे।

रोकथाम से अस्पतालों पर भार कम होगा..

निदेशक ने निष्कर्ष के रूप में कहा कि यदि एआई का उपयोग रोकथाम में प्रभावी रूप से किया जाए तो आपातकालीन स्थितियों और गंभीर मरीजों की संख्या घटेगी। अनावश्यक भर्ती कम होगी। जागरूकता और समय पर उपचार लेने की प्रवृत्ति बढ़ेगी। जनस्वास्थ्य परिणाम बेहतर होंगे। परिवारों और स्वास्थ्य व्यवस्था पर आर्थिक बोझ कम होगा।

उन्होंने अंत में कहा कि एआई को केवल “हाई-एंड तकनीक” न मानकर इसे “स्वास्थ्य सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बनाया जाना चाहिए।

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