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मैग्नेटिक रेज़ोनन्स इमेजिंग चिकित्सा उपचार में बना सहायक

डॉ. अर्चना ने ऑटिज़्म और ब्रेन ट्यूमर शोध में दी गति

 

 

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। चिकित्सा उपचार में एमआरआई के माध्यम से खोज कर नई दिशा प्रदान की गयी। ऑटिज़्म और ब्रेन ट्यूमर शोध में एमआरआई की नई दिशा

मैग्नेटिक रेज़ोनन्स इमेजिंग में हालिया प्रगतियाँ चिकित्सा शोध को तेज़ी से नई ऊँचाइयों तक ले जाने का कार्य किया है। अब इमेजिंग केवल निदान तक सीमित नहीं रही, बल्कि सटीक और लक्षित चिकित्सा विज्ञान का सशक्त माध्यम बन चुकी है।

मंगलवार को एसजीपीजीआई में आयोजित शैक्षणिक कार्यक्रम में उन्नत मैग्नेटिक रेज़ोनन्स स्पेक्ट्रोस्कोपी (MRS) तकनीकें ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, अनुवांशिक एवं चयापचय रोगों तथा ब्रेन ट्यूमर जैसे रोगों के शोध को गति प्रदान करने का कार्य किया है।

यह व्याख्यान अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त इमेजिंग वैज्ञानिक हरीश पॉप्तानी, प्रोफेसर एवं चेयर, सेंटर फॉर प्रीक्लिनिकल इमेजिंग, यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल (यूके) द्वारा दिया गया। डॉ. पॉप्टानी एसजीपीजीआई के ही नहीं, बल्कि भारत के प्रथम रेडियोलॉजी पीएचडी भी हैं।

उन्होंने बताया कि फंक्शनल व मेटाबॉलिक इमेजिंग से लेकर प्रीक्लिनिकल डिज़ीज़ मॉडलिंग तक की उन्नत एमआरआई तकनीकें मस्तिष्क विकास, ट्यूमर माइक्रोएन्वायरनमेंट और अनुवांशिक विकारों को अभूतपूर्व स्तर पर समझने में सहायक है,जो शीघ्र निदान, लक्षित उपचार और बेहतर रोगी परिणामों की आशा जगाती हैं।

यह आयोजन संस्थान के रेडियोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. अर्चना गुप्ता की दूरदर्शी अकादमिक सोच को दर्शाता है। डॉ गुप्ता के नेतृत्व में नवाचार, ट्रांसलेशनल रिसर्च और वैश्विक अकादमिक सहयोग को निरंतर गति प्रदान कर रहीं हैं।

इससे संस्थान एमआरआई में तकनीकी उत्कृष्टता के साथ स्वास्थ्य-सेवा की जटिल चुनौतियों के समाधान का सशक्त माध्यम साबित होगा।

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