उत्तर प्रदेशबड़ी खबरमनोरंजन

  वाद्य यंत्रो की ध्वनि में झूमें लोग

शास्त्रीय संगीत प्रतिभागियों का उत्कृष्ट कला प्रदर्शन 

 

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। वाद्य यत्रो की ध्वनि मानसिक ऊर्जा का संचार माना जाता है।

गुरुवार को राजधानी में संगीत मिलन संगठन द्वारा आयोजित चार दिवसीय शास्त्रीय संगीत प्रतियोगिता “क्लासिकल वॉयस ऑफ इंडिया–2025” के द्वितीय दिवस का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन के साथ सरस्वती वंदना से की गयी।

वहीं प्रतियोगिता में कोलकाता, हल्द्वानी, चंडीगढ़, लखनऊ और वाराणसी सहित विभिन्न शहरों से आए कुल 27 प्रतिभागियों ने तबला विधा में अपनी उत्कृष्ट कला का प्रदर्शन किया।

जिसमें पुणे, महाराष्ट्र से आए जूनियर वर्ग के समृद्ध हलधर ने तबला पर तीन ताल, अयोध्या के माधव झा ने पखावज पर चौताल, कर्नाटक–बेंगलुरु के अक्षज कुलकर्णी (मिडिल वर्ग) ने तीन ताल, हल्द्वानी के वरिष्ठ वर्ग के ऋजुल पांडेय ने झपताल, तथा अगरतला से आए मंदीप घोष ने पखावज वादन की प्रस्तुति दी। जिसे श्रोताओं ने करतल ध्वनि ख़ुशी जाहिर की।

वाद्य संगीत प्रस्तुतियों में महाराष्ट्र के कोल्हापुर से आई राधा वडुलेकर ने सितार पर राग यमन प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। मिडिल वर्ग में निर्मल्या रे की सोनाली केसरी ने वायलिन पर राग मियां की मल्हार और कोलकाता की ही सयंति पल वायलिन पर राग मियां की तोड़ी प्रस्तुतु किया ।

इटारसी , मध्य प्रदेश की मीरा चौधरी ने बाँसुरी पर राग यमन प्रस्तुत किया, जो श्रोताओं के लिए अत्यंत आकर्षक रहा।

यह अखिल भारतीय शास्त्रीय संगीत प्रतियोगिता वर्षों से लखनऊ से शुरू होकर देश के 10 से अधिक राज्यों तक अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुकी है। पुणे, कोलकाता, अगरतला, हल्द्वानी, वाराणसी, दिल्ली, चंडीगढ़, लखनऊ सहित विभिन्न शहरों में प्रतिभाओं की

खोज कर उन्हें मंच प्रदान करने का सफल प्रयास संगीत मिलन निरंतर करता रहा है। कार्यक्रम में संगीत मिलन के संस्थापक पंडित मिलन देबनाथ, सचिव अरुंधति चौधरी, तथा निर्णायक मंडल के रूप में पंडित (प्रोफेसर) हरीश झा (कानपुर), पंडित शीतल प्रसाद मिश्रा ( लखनऊ ),

पंडित अरुण भट्ट(लखनऊ) और पंडित महेंद्र प्रसाद शर्मा (चंडीगढ़) उपस्थित रहे। उन्होंने युवा प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। साथ ही निर्णायक मंडल द्वारा प्रतिभागियों के साथ एक प्रेरक प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया।

जिसमें तकनीकी सुझाव, मंच-व्यवहार, रियाज़ के तरीकों तथा संगीत में करियर निर्माण पर उपयोगी मार्गदर्शन दिया गया। यह संवाद युवा ताल-कलाकारों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी सिद्ध हुआ।

संगीत मिलन संस्था की डॉ. निष्ठा शर्मा, डॉ. अंजना मिश्रा, राजेश ओझा, सुमित मालिक, मधुर भटनागर, शिप्रा सक्सेना, आयुषी शुक्ला, बिंदु सहित अन्य सदस्यों की भी उपस्थिति रही। जिन्होंने आयोजन की सुचारू व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button