अंतर्राष्ट्रीयउत्तर प्रदेशबड़ी खबरराष्ट्रीय

धरती माँ भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने को करना होगा कार्य – डॉ.नारायण

एनबीआरआई में 7वीं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ

 

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी में देश दुनिया के वैज्ञानिकों के लिए एक मंच साझा किया गया। रविवार को एनबीआरआई में 7वीं अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ के पहले दिन

पादप एवं पर्यावरणीय प्रदूषण पर 7वीं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन सीएसआईआर – नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट परिसर में किया गया।

जिसमें इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एनवायरनमेंटल बॉटनिस्ट्स और नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह वैश्विक वैज्ञानिक सम्मेलन, पादप विज्ञान, जलवायु स्थिरता तथा पर्यावरणीय पुनर्स्थापन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए

विश्व के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के लिए मंच साझा किया गया। जिसका केंद्रीय विषय है “पर्यावरण के लिए जीवनशैली (लाइफस्टाइल), हरित विकास और सतत भविष्य को आगे बढ़ाने के लिए पौधे और पारिस्थितिकी तंत्र”। वहीं

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. भास्कर नारायण निदेशक CSIR-IITR की उपस्थिति रहे। साथ ही विशिष्ट अतिथियों के रूप में प्रो. एसके बारिक (नेहू,शिलांग ), प्रो. एलीना ओक्सानेन (यूनिवर्सिटी ऑफ़ ईस्टर्न फिनलैंड), तथा प्रो. स्वाधीन बेहेरा (JAMSTEC, जापान) ने कार्यक्रम शामिल रहे।

वहीं संस्थान निदेशक डॉ. अजित कुमार शासनी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान की 60 वर्षों से अधिक की गौरवशाली वैज्ञानिक विरासत का उल्लेख किया।

उन्होंने इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन के महत्व को रेखांकित किया तथा पौधों की पर्यावरणीय स्वास्थ्य संकेतकों तथा प्राकृतिक जैवउपचारकों के रूप में वैज्ञानिक भूमिका पर जोर दिया। साथ ही

डॉ. सौमित के. बेहरा, आयोजन सचिव, ICPEP एवं वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक, सीएसआईआर-एनबीआरआई ने बताया कि ICPEP-7 को भारत और विदेशों के वैज्ञानिकों से अत्यंत उत्साहजनक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है।

300 से अधिक प्रतिभागियों ने सम्मेलन में भाग ले रहे। जिनमें वैज्ञानिक, शोधकर्ता, नीति-निर्माता, उद्योग प्रतिनिधि एवं विद्यार्थी शामिल हैं। इनमें से लगभग 250 भारतीय एवं 30 विदेशी प्रतिनिधि (बांग्लादेश, फ़िनलैंड, जापान, मैक्सिको, पुर्तगाल, स्पेन, रूस, स्वीडन, यूके, यूएसए ) से हैं, जो इस सम्मेलन को एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय मंच के सहभागी बनेगें।

समारोह की विशिष्ट अतिथि, प्रो. एलीना ओक्सानेन, यूनिवर्सिटी ऑफ़ ईस्टर्न फ़िनलैंड ने यूरोप-भारत अनुसंधान सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए, अत्यधिक पर्यावरणीय परिस्थितियों में पौधों की प्रतिक्रिया पर अनुसंधान के महत्व को रेखांकित किया।

समारोह के दूसरे विशिष्ट अतिथि प्रो. स्वाधीन बेहेरा, JAMSTEC, जापान ने वैश्विक जलवायु तंत्र, महासागर-वायुमंडल अंतःक्रिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित जलवायु मॉडलिंग पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कृषि और पारिस्थितिकी के संदर्भों में वैज्ञानिक पूर्वानुमानों के महत्व पर बल दिया।

समारोह के तीसरे विशिष्ट अतिथि प्रो. एसके बारिक, नेहू एवं पूर्व निदेशक, सीएसआईआर-एनबीआरआई ने इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एनवायरनमेंटल बॉटनिस्ट्स के संस्थापक अध्यक्ष तथा पूर्व वैज्ञानिकों के योगदान को याद किया और पर्यावरण संरक्षण के लिए वैश्विक समन्वित प्रयासों का आह्वान किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. भास्कर नारायण ने पर्यावरण प्रदूषण की बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए पौधों-आधारित वैज्ञानिक अनुसंधान की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने “प्रकृति रक्षति रक्षिता” के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए पर्यावरण संरक्षण की भारतीय संस्कृति में निहित गहरी समझ को रेखांकित किया।

उन्होंने पर्यावरणीय एवं वैज्ञानिक नेतृत्व के क्षेत्र में सीएसआईआर-एनबीआरआई और इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एनवायरनमेंटल बॉटनिस्ट्स के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने आगे Tap, Lead and Start Development का आह्वान करते हुए कहा कि हमने लंबे समय तक प्रकृति को हल्के में लिया है,

अब यह हमारा दायित्व है कि हम धरती माँ को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने के लिए जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करें।

इस अवसर पर गणमान्य अतिथियों द्वारा सम्मलेन की एब्स्ट्रैक्ट बुक और सोविनियर का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम में 2023 एवं 2024 के लिए इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एनवायरनमेंटल बॉटनिस्ट्स फेलोशिप और यंग साइंटिस्ट मेडल से सम्मानित वैज्ञानिकों को भी सम्मानित किया गया।

वैज्ञानिकों को मिला फेलोशिप सम्मान..

ISEB फेलोशिप (2023–2024)

ISEB द्वारा निम्नलिखित वैज्ञानिकों को फेलोशिप सम्मान प्रदान किया गया। जिसमें प्रो. पुरबी साइकीया (BHU) जंगली प्रजातियों की पारिस्थितिकी एवं वन कार्बन अनुसंधान, डॉ. नरेंद्र कुमार (BBAU) प्रदूषक गतिशीलता एवं नदी तंत्र अध्ययन, प्रो. अनिल प्रकाश (Barkatullah Univ.) माइक्रोब पौधा अंतःक्रिया एवं अपशिष्ट अपघटन,

डॉ. अविनाश कौर नागपाल (GNDU) भारी धातु विषाक्तता एवं वायु प्रदूषण सहनशीलता, प्रो. बंदना बोस (BHU) नाइट्रेट सीड हार्डनिंग तकनीक के आविष्कारक, प्रो. शशि पांडेय (BHU) पौधों में तनाव सहनशीलता एवं फाइटोरिमेडिएशन,डॉ. सौमित के. बेहरा (CSIR-NBRI) जलवायु पारिस्थितिकी एवं लीफ-एरिया इंडेक्स विधि,

डॉ. पुनीत सिंह चौहान (CSIR-NBRI) लाभकारी सूक्ष्मजीव एवं बायोस्टिमुलेंट्स अनुसंधान,डॉ. ऋचा कोठारी (CU Jammu) अपशिष्ट उपचार एवं संसाधन पुनर्प्राप्ति तकनीक,डॉ. चंद्रशेखर सेठ (DU Delhi) पौधों में हार्मोन-संबंधी तनाव संकेत एवं फाइटोरिमेडिएशन से नवाजा गया।

ISEB यंग साइंटिस्ट मेडल (2023–2024)

युवा शोधकर्ताओं के उत्कृष्ट योगदान की मान्यता में डॉ. दिपाली श्रीवास्तव (NCSU, USA) धातु तनाव सहनशीलता संकेत, डॉ. रितिका स्रिनेट (Helsinki University) जलवायु–वन मॉडलिंग, प्रिया प्रियदर्शिनी (IIT Hyderabad) – स्मार्ट सिटी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन,

डॉ. श्रोत राज विमल (Allahabad Univ.) – सूक्ष्मजीव आधारित तनाव निवारण एवं मिट्टी पुनर्स्थापन, डॉ. पुजारिनी समल (CSIR-NBRI) – पुराकालीन जलवायु एवं मैंग्रोव पारिस्थितिकी को सम्मानित किया गया।

इस सम्मेलन में उद्घाटन प्लेनरी सत्र में 3 प्रमुख वक्ताओं में प्रो. एलीना ओक्सानेन, प्रो. स्वाधीन के. बेहेरा और प्रो. एसके बारिक के व्याख्यान दिया। जिसके उपरांत दोपहर सत्र में 4 और प्लेनरी व्याख्यान तथा 18 मौखिक प्रस्तुतियां विभिन्न तकनीकी सत्रों में हुईं।

इन प्रस्तुतियों में जैव विविधता संरक्षण, जलवायु सहनशीलता, फाइटोरिमेडिएशन, कृषि स्थिरता, पर्यावरणीय निगरानी तथा पौधों की प्रदूषण प्रतिक्रिया जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।

अंत में, डॉ. विवेक पांडेय, उपाध्यक्ष इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एनवायरनमेंटल बॉटनिस्ट्स ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button