क्वीन मैरी अस्पताल का मातृ मृत्यु दर पर अध्ययन, निकाली बड़ी जानकारी
थ्री डिलेज़ मॉडल” से मातृ मृत्यु के निकले प्रमुख कारण- डॉ. सुजाता देव

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। डॉक्टर ने मातृ मृत्यु दर पर बड़ी जानकारी हासिल की है।
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के महिला एवं प्रसूति रोग विभाग (क्वीन मेरी अस्पताल) द्वारा जनवरी 2024 से जनवरी 2025 के बीच किए गए एक अध्ययन में यह सामने आया है कि प्रसव के दौरान मातृ मृत्यु के अधिकांश मामले “थ्री डिलेज़ मॉडल (थ्री डिलेज मॉडल)” के पहले और दूसरे चरण से संबंधित हैं,यानी समय पर चिकित्सा सहायता लेने में देरी और स्वास्थ्य सुविधा तक पहुँचने में बाधाएँ मुख्य कारण निकला है।
रविवार को इस अध्ययन की जानकारी डॉ. सुजाता देव, डॉ. वंदना सोलंकी और डॉ. मानवी गर्ग द्वारा संयुक्त रूप से बताया गया। साथ ही उन्होंने बताया कि अभी इसका प्रस्तुतीकरण हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में आयोजित फेडरेशन ऑफ़ इंटरनेशनल Gynecology and Obstetrics (FIGO) World Congress में किया गया।
अध्ययन में निकले मुख्य निष्कर्ष..
> 49% मामलों में पहला Delay प्रमुख कारण — जोखिम लक्षणों की पहचान और निर्णय लेने में देरी।
> 44.5% मामलों में दूसरा Delay — देर से रेफरल और परिवहन में कठिनाई।
> केवल 6.5% मामलों में तीसरा Delay — स्वास्थ्य सुविधा में उपचार शुरू होने में देरी।
प्रत्यक्ष कारणों का विश्लेषण:
> 18.6% — प्रसवोत्तर रक्तस्राव और गर्भाशय फटना (Obstetric Hemorrhage)
> 13.3% — एक्लेम्प्सिया
> 9.5% — असुरक्षित गर्भपात एवं एक्टोपिक प्रेग्नेंसी
> 8.1% — सेप्सिस
> 7.1% — प्रीएक्लेम्प्सिया
> 5.2% — गर्भावस्था-संबंधी संक्रमण
> 2.9% — गंभीर एनीमिया
> 2.9% — मलेरिया, डेंगू, स्क्रब टायफस जैसे संक्रमण
अप्रत्यक्ष कारणों में हृदय एवं यकृत संबंधी विकार प्रमुख रहे।
जानें स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सुझाव..
डॉ. सुजाता देव कहती हैं,
“थ्री डिलेज़ मॉडल यह समझने में मदद करता है कि प्रसव या गर्भावस्था के दौरान किस स्तर पर महिला को जीवन रक्षक देखभाल में देरी होती है। यह जानकारी भविष्य की नीतियों और हस्तक्षेपों को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
डॉ. वंदना सोलंकी के अनुसार,
“अध्ययन का उद्देश्य यह था कि इन तीनों प्रकार की देरियों का मातृ मृत्यु दर पर क्या प्रभाव पड़ता है और सुधार की दिशा में कौन-सा स्तर सबसे महत्वपूर्ण है।
डॉ. मानवी गर्ग कहती हैं,
“मातृ मृत्यु को कम करने के लिए रेफरल तंत्र को मजबूत करना, सम्मानजनक प्रसव देखभाल सुनिश्चित करना और सामुदायिक स्तर पर प्रसवपूर्व शिक्षा व जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।”
वैश्विक संदर्भ में महत्व
सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के तहत लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक वैश्विक मातृ मृत्यु दर को प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर 70 से कम किया जाए। “थ्री डिलेज़ मॉडल” जैसी विश्लेषणात्मक पहलें यह दिशा दिखाती हैं कि कैसे स्थानीय स्तर पर समझ और हस्तक्षेप के ज़रिए मातृ मृत्यु को रोका जा सकता है।



