केजीएमयू के सेकंड बीडीएस छात्रों के भविष्य पर मंडराया संकट
अधिष्ठाता दंत संकाय पद निरस्तीकरण आदेश से छात्रों की बढ़ी उलझने

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय का डेंटल डिपार्टमेंट कानूनी दांव पेंच में उलझ गया है। जिसके चलते बीडीएस छात्रों के भविष्य पर संकट मंडराने लगा है। मामला संस्थान के डेंटल डिपार्टमेंट का है,जहां पर अधिष्ठाता दंत संकाय के पद को बीते माह 22 जुलाई को राज्यपाल द्वारा जारी आदेश के चलते निरस्त किया गया।
जिससे इसी माह में सेकंड बीडीएस छात्रों का एग्जाम कराने के लिए फॉर्म पर साइन होना बाकी भी है। जिसमें लगभग 44 सेकंड बीडीएस छात्रों का भविष्य कानूनी दांव पेंच में उलझा हुआ दिखाई दे रहा है। वहीं सूत्रों की माने तो केजीएमयू में अधिष्ठाता दंत संकाय पद विवादों की भेंट चढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।
इसमें सीनियारिटी का भी दखलअंदाजी होना बताया जा रहा है। साथ ही सूत्रों का यह भी कहना है कि जिसे सीनियरिटी का दर्जा दिया जा रहा है,उसके खिलाफ थाने में मामले भी दर्ज हैं। मिली जानकारी के अनुसार आदि अधिष्ठाता दंत संकाय पद के लिए कई नियमों में चाल चरित्र का आकलन भी किया जाता है।
बता दे की 30मई 2023 से अधिष्ठाता दंत संकाय के पद पर डॉ रंजीत पाटिल संभाल रहे थे। वहीं जब बीते माह 22 जुलाई को राज्यपाल द्वारा 29 मई 2023 के नियुक्ति पद को निरस्त करने के लिए आदेश जारी कर दिया गया। वहीं आदेश मिलते ही अधिष्ठाता दंत संकाय के द्वारा साइन करना बंद कर दिया गया।
जिससे छात्रों के लिए मुश्किलें बढ़ गई। कानूनी उलझनों में अधिष्ठाता दंत संकाय पद के चलते फर्स्ट एमडीएस दाखिले के लिए अड़चन आ रही है। वही एमडीएस के छात्र जॉइनिंग के लिए इधर-उधर चक्कर लगा रहें हैं। इसके अलावा नीट पीजी से 46 सीट में एडमिशन भी होना बाकी चल रहा है। ऐसे कानूनी दांवपेंच में उलझे पद के कारण सेकंड बीडीएस की होने वाली परीक्षा में विलंब होने की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
इसके लिए संस्थान प्रशासन को छात्रों को भविष्य देखते हुए त्वरित निर्णय लेना चाहिए। जिससे छात्रों के भविष्य पर मंडरा रहा संकट दूर हो सके।
एंपलॉयर एग्जीक्यूटिव काउंसिल मीटिंग कर जल्द निर्णय प्रस्तुत करेगी। अधिष्ठाता दंत संकाय द्वारा दस्तखत न करने से जो क्राइसिस उत्पन्न हुई है,उस पर काउंसिल जल्द न्यायोचित निर्णय देगी।
प्रो. केके सिंह
प्रवक्ता केजीएमयू लखनऊ उत्तर प्रदेश



