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2 ऑपरेशन थिएटर से शुरुआत होकर अब 50 से अधिक ऑपरेशन थिएटर

एनेस्थिसियोलॉजी विभाग का 39वां स्थापना दिवस समारोह

 

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। एनेस्थिसियोलॉजी विभाग की शुरुआत 2 ऑपरेशन से होकर अब 50 से अधिक ऑपरेशन थिएटर हो गए हैं।

एसजीपीजीआई के एनेस्थिसियोलॉजी विभाग द्वारा विभाग के प्रो. सोमा कौशिक ऑडिटोरियम में अपना 39वां स्थापना दिवस मनाया गया।

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर सैफई, इटावा स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज के पूर्व वाइस-चांसलर और एम्स , पटना के पूर्व डायरेक्टर प्रो पीके सिंह को आमंत्रित किया गया था।

प्रो. पीके सिंह ने 7वां प्रो. सोमा कौशिक ओरेशन (व्याख्यान) दिया। उन्होंने इस बात पर चर्चा की कि किसी विभाग को कैसे काम करना चाहिए और उसके सदस्यों द्वारा उसका प्रबंधन कैसे किया जाना चाहिए।

इस कार्यक्रम में एसजीपीजीआई के निदेशक पद्मश्री प्रो. आरके धीमन, डीन प्रो. मनोज जैन, एनेस्थिसियोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. संजय धीराज, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. देवेंद्र गुप्ता,

एक्जीक्यूटिव रजिस्ट्रार कर्नल वरुण बाजपेयी, विभाग की पूर्व फैकल्टी प्रो. अनिल अग्रवाल और प्रो. शशि श्रीवास्तव शामिल हुए।

प्रो. आरके धीमन ने एनेस्थिसियोलॉजी विभाग को उसके 39वें स्थापना दिवस पर बधाई दी और उसकी सराहना की।

उन्होंने विभाग की फैकल्टी, रेजिडेंट्स, नर्सिंग और टेक्निकल स्टाफ को अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतरीन काम करने के लिए प्रेरित किया ताकि संस्थान के एनेस्थिसियोलॉजी विभाग को देश के सबसे अच्छे विभागों में से एक बनाया जा सके।

प्रो. मनोज जैन ने मेडिकल छात्रों और मरीजों के फायदे के लिए एनेस्थिसियोलॉजी के क्षेत्र में इतने सारे कोर्स शुरू करने के लिए विभाग को बधाई दी। उन्होंने कामना की कि विभाग भविष्य में कई और उपलब्धियां हासिल करे।

प्रो. संजय धीराज ने विभाग के प्रगति के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि कैसे विभाग की शुरुआत सिर्फ़ 2 ऑपरेशन थिएटर से हुई थी और अब यह 50 से ज़्यादा ऑपरेशन थिएटर में एनेस्थीसिया सेवाएं दे रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि एनेस्थीसिया के बारे में लोगों में जागरूकता बहुत कम है। लोगों को अक्सर यह एहसास नहीं होता कि जैसे-जैसे सर्जरी की संख्या बढ़ती है। मरीज के प्रबंधन की जटिलता भी बढ़ती जाती है।

इस अंतर को पाटने के लिए, एनेस्थिसियोलॉजी विभाग ‘पेरिऑपरेटिव मेडिसिन’ (सर्जरी के दौरान और उसके आसपास दी जाने वाली चिकित्सा) के कॉन्सेप्ट को बढ़ावा दे रहा है।

पेरिऑपरेटिव मेडिसिन के इस कॉन्सेप्ट के साथ, एनेस्थिसियोलॉजिस्ट का काम सिर्फ़ सर्जरी तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि सर्जरी से पहले, उसके दौरान और उसके बाद भी चलता है।

फ़ाउंडेशन डे प्रोग्राम के नोडल फ़ैकल्टी डॉ. संदीप खुबा ने कहा कि विभाग को उस परंपरा को आगे बढ़ाना चाहिए जिसे विभाग के वरिष्ठों और पूर्वजों ने मौजूदा सदस्यों के कंधों पर सौंपा है।

विभाग ने अपने सबसे अच्छा काम करने वाले सदस्यों को उनके बेहतरीन काम के लिए सम्मानित भी किया।

इस कार्यक्रम में शानदार प्रदर्शन करने वाले सदस्यों को किया पुरस्कृत

बेस्ट फैकल्टी: डॉ. तापस कुमार सिंह; बेस्ट जूनियर रेजिडेंट III: डॉ. मीनाक्षी के, डॉ. प्रशंसा अत्री, डॉ. राहुल कुमार मिश्रा; बेस्ट ऑफिस स्टाफ: पवन कुमार दुबे; बेस्ट नर्सिंग ऑफिसर:

सचिन पी जोसेफ; बेस्ट नर्सिंग ऑफिसर (आउटसोर्स): अमित तिवारी; बेस्ट टेक्निकल ऑफिसर: चंद्रेश कुमार कश्यप; बेस्ट टेक्निकल ऑफिसर (आउटसोर्स): रुचि सिंह; बेस्ट सीनियर रेजिडेंट्स:

डॉ. जैस्मीन कौर, डॉ. अर्पिता यादव, डॉ. श्रद्धा गांगले, डॉ. आयुषी श्रीवास्तव और डॉ. दीक्षा रानी। इस कार्यक्रम का आयोजन डॉ. संदीप खुबा, डॉ. सुरुचि, डॉ. सपना यादव, शंकर लाल और विभाग के रेजिडेंट्स व टेक्निकल स्टाफ ने किया।

टेक्निकल स्टाफ प्रमिला, रुचि, शिवानी, किरण, रिंकी और कौशिकी ने अपनी सुरीली आवाज़ और माँ सरस्वती की वंदना से सभी का मन मोह लिया। विभाग के सीनियर टेक्निकल ऑफिसर राजीव सक्सेना ने कार्यक्रम के आयोजन और मीडिया व प्रतिनिधियों के साथ बातचीत में अहम भूमिका निभाई।

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