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होली रंगोंत्सव पर लगा चन्द्र ग्रहण, बना असमंजस 

4 को रंगोंत्सव मनाने का शुभ मुहूर्त - राजेश शुक्ल

 

 लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। हिन्दू सनातन धर्म का सबसे बड़े त्योहारों में से एक होली रंगोंत्सव पर चन्द्र ग्रहण लगने से अमंजस की स्थिति बनी हुई है ।

होली रंगोंत्सव के असमंजस को दूर करने के लिए रविवार को आचार्य राजेश कुमार शुक्ल ने बताया कि इस बार होली रंगोंत्सव 4 मार्च को मनाने का शुभ मुहूर्त है। आदि काल से

फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को होलिका दहन होता आ रहा है और यह होलिका दहन 2 मार्च दिन सोमवार को पूर्णिमा सायं 5:18 से 3 मार्च मंगलवार को सायं 4:33 मिनट तक रहेगी। भद्रा 2 मार्च को सायं 5:18 से रात्रि 4:56 तक रहेगा।

आचार्य शुक्ल कहते हैं कि हिन्दुओं से सभी त्यौहार उदया तिथि से मनाने का विधान बताया गया है। इसलिए अबकी बार चैत्र कृष्ण प्रतिप्रदा यानि (परीवा ) सायं काल में लगेगी।

इसलिए चैत्र कृष्ण प्रतिप्रदा रंगोंत्सव 4 मार्च उदया तिथि को शुभ मुहूर्त रहेगा।

होलिका दहन मुहूर्त..

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 2 मार्च सोमवार की रात्रि रात्रि 11:53 से 12:50 तक रहेगी। आचार्य शुक्ल कहते हैं कि ‘ ॐ होलिकायै नमः’ इस मंत्र के द्वारा पूजन कर होलिका दहन करें।

अगले रंगोंत्सव खंडग्रास चंद्र ग्रहण के कारण सभी सनातनी प्रेमी एक दूसरे को तीन मार्च को स्वयं 7:15 के बाद से रंग उत्सव मनाएं। इस बार रंगों से 4 मार्च को धूमधाम से मनाया जाएगा।

जबकि चंद्र ग्रहण फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा 3 मार्च मंगलवार को खंडग्रास चंद्र ग्रहण लगेगा,जो भारत में ग्रस्तोदित खंडग्रास चंद्र ग्रहण के रूप में दिखाई देगा। यह दृश्य समय शाम 6 बजे से मोक्ष सायं 6:48 तक रहेगा। सूतक प्रातः 9 बजे से लगेगा।

जानें चंद्र ग्रहण का राशियों पर प्रभाव..

मिथुन, तुला,वृश्चिक,मीन राशियों के लिए शुभ होना बताया गया है, जैसे धन, स्वस्थ आयु, विद्या लाभ होना बताया गया और मेष, बृष,कर्क,सिंह, कन्या, धनु मकर, कुंभ इन सभी राशियों पर अशुभ का प्रभाव का उल्लेख किया गया है। जिसमें मानहानि, रोग, आर्थिक नुकसान शामिल है.

ग्रहण प्रभाव खत्म होने पर करें स्नान दान..

ग्रहण के स्पर्श के समय स्नान पुनः मोक्ष के समय स्नान करना चाहिए। राजेश कुमार शुक्ला ने बताया कि

सूतक लग जाने पर मंदिरों में प्रवेश करना मूर्ति को स्पर्श तथा भोजन, मिथुन क्रिया व यात्रा आदि वर्जित बताया गया है। यदि बालक वृद्ध रोगी है वह आवश्यकतानुसार अल्पाहार ले सकते हैं।

भोजन सामग्री जैसे दूध दही घी आदि कुश रख देना चाहिए। ग्रहण मोक्ष के बाद पीने का पानी ताजा लेना चाहिए और गर्भवती महिलाएं पेट पर गाय का गोबर पतला लेप लगाए। ग्रहण काल में गुरु मंत्र का जाप करना चाहिए। श्रद्धा,दान, जप मंत्र आदि का शास्त्रोक्त विधान करना आवश्यक बताया गया है।

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