एआई इम्पैक्ट समिट 2026: एसजीपीजीआई ने जीता मोस्ट इन्नोवेटिव पुरस्कार
संस्थान निदेशक ने इस उपलब्धि पर जताई खुशी

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी में एआई आधारित चिकित्सा तकनीकी को सफल बनाने के लिए पुरस्कृत किया गया। एसजीपीजीआई-डेक्ट्रोसेल साझेदारी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में मोस्ट इन्नोवेटिव कैटेगरी पुरस्कार प्रदान किया गया।
भारत के चिकित्सा प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन के रूप में एसजीपीजीआई और डेक्ट्रोसेल हेल्थकेयर के बीच सहयोग को 20 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में “सबसे अभिनव” (मोस्ट इन्नोवेटिव ) पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
यह पुरस्कार एआई-आधारित फेफड़े की जांच तकनीक, डेकएक्सपर्ट (चेस्ट एक्स रे के लिए ऐप रीडर, टीबी का पता लगाने के लिए पुरस्कार से नावाजा गया। इससे उन ग्रामीण क्षेत्रों में जहां विशेषज्ञ रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सकों की भारी कमी है।
इससे अत्यधिक लाभ होगा। वस्तुतः यह भारत की सबसे गंभीर नीतिगत चुनौतियों में से एक चुनौती का समाधान करती है।
जानें संस्थान के इस नवाचार उपलब्धि के बारे में.. संस्थागत नवाचार का एक सिद्ध मॉडल
डॉ. आलोक नाथ (पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख) के नेतृत्व में और डॉ. अर्चना गुप्ता (रेडियोलॉजी विभाग की प्रमुख) के सहयोग से, पल्मोनरी टीबी के रेडियोलॉजिकल निदान के उद्देश्य से इस सशक्त एआई मॉडल का नैदानिक सत्यापन अध्ययन संस्थान के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग द्वारा किया गया था।
इसे नेचर साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित भी हुआ।जिसमें स्पूटम जीनएक्सपर्ट (गोल्ड स्टैंडर्ड) की तुलना में पल्मोनरी टीबी के निदान में इस ऐप की 95% सटीकता प्रदर्शित की गई।
इस स्टडी के सह-लेखक डॉ. आलोक नाथ, डॉ. ज़िया हाशिम और डाॅ प्रशांत (पल्मोनरी मेडिसिन, डॉ. ज़फ़र नेयाज़ (रेडियोडायग्नोसिस विभाग,
डॉ. ऋचा मिश्रा (माइक्रोबायोलॉजी, डॉ. अंकित शुक्ला (क्वींसलैंड विश्वविद्यालय ड्यूक मेडिकल स्कूल, एनयूएस सिंगापुर; संस्थापक, डेक्ट्रोसेल), डॉ. सौम्या शुक्ला ( सह-संस्थापक, डेक्ट्रोसेल) और निखिल मिश्रा (आईआईटी कानपुर; सीटीओ, डेक्ट्रोसेल) हैं।
एसजीपीजीआई ने महत्वपूर्ण नैदानिक अधःसंरचना और नीतिपरक डेटा ढांचा प्रदान किया। जिससे संस्थापकों डॉ. सौम्या शुक्ला, डॉ. अंकित शुक्ला और निखिल मिश्रा को उच्च सटीकता और कम बैंडविड्थ वाला नैदानिक उपकरण विकसित करने में सहायता मिली।
नीति निर्माताओं के विचार..
प्रशासकों और स्वास्थ्य नीति निर्माताओं के लिए, एसजीपीजीआई-डेक्ट्रोसेल मॉडल सभी के स्वास्थ्य कवरेज का एक व्यवहारिक मार्ग प्रदर्शित करता है।
👉 विस्तार योग्य पहुंच: यह एआई एप पहले से ही छह राज्यों (महाराष्ट्र, तमिलनाडु, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश सहित) के 25 केन्द्रों पर सक्रिय है, जहां विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं। वहां तत्काल एक्स-रे जांच व निदान की सुविधा प्रदान करता है।
कम लागत : डिजिटल और गैर-डिजिटल (जेपीजी) दोनों छवियों को संसाधित करके, यह तकनीक महंगे पीएसीएस बुनियादी ढांचे की आवश्यकता को समाप्त कर देती है। जिससे यह संसाधन-सीमित जिलों के रोगियों के एक वरदान बन जाती है।
👉 प्रणालीगत राहत: यह उपकरण अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भी अत्यंत लाभदायक है, जिससे श्वसन संबंधी मामलों का त्वरित वर्गीकरण संभव हो पाता है और एसजीपीजीआई जैसे तृतीयक चिकित्सा केंद्रों पर रोग के निदान का बोझ कम होता है।
इस उपलब्धि पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए संस्थान के निदेशक पद्म प्रोफेसर आरके धीमन ने कहा, “यह पुरस्कार एसजीपीजीआई की स्वदेशी नवाचारों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को प्रमाणित करता है, जो केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहते, बल्कि भारतीय स्वास्थ्य सेवा के अंतिम छोर तक पहुंचते हैं।
डेक्ट्रोसेल इस एआई ढांचे का विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, ताकि इसमें सीटी और एमआरआई मॉड्यूल शामिल हो। जिससे भारत के डिजिटल सार्वजनिक स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को और मजबूती मिल सके।



