UGC के नए नियमों पर सर्वोच्च न्यायालय ने लगाई रोक
चीफ जस्टिस सूर्यकांत एवं जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने लगाई रोक

नई दिल्ली।लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन-2026 सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। जिसका विरोध देश भर अलग अलग शहरों कस्बे गांव सड़क तक में आग की फैलता गया।
गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई करते हुए यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी है। हाल ही में यह याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
वही विष्णु शंकर जैन ने बताया कि आज सर्वोच्च न्यायालय ने हमारी उस याचिका पर सुनवाई की। जिसमें हाल ही में लागू किए गए यूजीसी नियमों को चुनौती दी थी। न्यायालय ने यूजीसी पर रोक लगा दी है और अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। वहीं सर्वोच्च न्यायालय ने 2012 की गाइडलाइन को जारी रखने का आदेश दिया है।
याचिकाकर्ता की दलील..
इस पर कोर्ट ने अपने विशेष का विशेष अधिकार का प्रयोग करते हुए सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में मौजूद वरिष्ठ अधिवक्ता विशेष शंकर जैन ने साफ कहा कि यह लड़ाई किसी वर्ग नहीं बल्कि, संविधान में दी गई सामान्य आर्टिकल 14 की है।
उन्होंने कहा कि सिर्फ उन्हें सवर्ण का वकील कहकर बात कर पेश करना गलत है। मैं हर वर्ग का वकील हूं,पिछड़ो का भी हूं, अगड़ों का भी हूं।
सवाल सिर्फ बराबरी का है। विष्णु शंकर जैन ने खास तौर पर यूजीसी गाइडलाइन के क्षेत्र 3c पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि इस सेक्शन में मान लिया गया है कि जातिगत भेदभाव सिर्फ एससी एसटी और ओबीसी के खिलाफ ही हो सकता है, बल्कि इससे जनरल कैटेगरी को पूरी तरह बाहर कर दिया गया है।
यही बात सवर्ण को भेदभावपूर्ण लगी और वह विरोध जताने लगे। उन्होंने कहा इसी आधार पर विरोध किया गया। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जब सेक्शन में 3E में पहले से ही भेदभावपूर्ण परिभाषा मौजूद है, तो 3c की जरूरत क्या थी और साथ ही छात्रों को जाति आधारित बांटने पर भी सवाल उठाया। 2012 की गाइडलाइन को जारी रखने का आदेश दिया गया है।
चीफ चीफ जस्टिस के सवाल..
CJI सूर्यकांत ने नए नियमों पर सवाल उठाते हुए कहा- हमने जातिविहीन समाज की दिशा में कितना कुछ भी हासिल किया है। क्या अब हम उल्टी दिशा में चल रहे हैं?
CJI ने कहा- शैक्षणिक संस्थानों में भारत की एकता झलकनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।
CJI ने केंद्र से कहा- आप SC/ST स्टूडेंट्स के लिए अलग हॉस्टलों की बात कर रहे हैं। ऐसा मत कीजिए। आरक्षित समुदायों में भी ऐसे लोग हैं जो समृद्ध हो गए हैं। कुछ समुदाय दूसरों की तुलना में बेहतर सुविधाओं का आनंद ले रहे हैं।
इधर, देशभर में सवर्ण जाति के स्टूडेंट्स और आम नागरिकों का यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर विरोध जारी है। वहीं जानकारों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय देकर देश को जातिगत बटवारा होने से बचा लिया है। साथ ही यह भी कहा कि देश जाति आधारित भेदभाव पूर्ण यूजीसी का नया नियम लागू होने से शिक्षण संस्थान की बजाय छात्र छात्राओं का शोषण झलक रहा था।



