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 सेवा खरीदी नहीं जा सकती – स्वामी मुक्तिनाथानन्द 

 विवेकानंद हॉस्पिटल में मना गणतंत्र दिवस 

 

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। ध्वजारोहण के साथ गणतंत्र दिवस मनाया गया। सोमवार को विवेकानन्द पॉलीक्लीनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान में 77वाँ गणतंत्र दिवस समारोह मनाया गया।

रामकृष्ण मठ के मठाध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द द्वारा मठ परिसर में आश्रम के साधुओ व कर्मचारियों की उपस्थिति में ध्वजारोहण किया व राष्ट्रगान किया गया। इसके तत्पश्चात विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान के सचिव स्वामी मुक्तिनाथानन्द द्वारा अस्पताल में ध्वजारोहण कर एवं राष्ट्रीय गान और वन्देमातरम का गान गाया गया।

इस अवसर पर संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक, प्रशासनिक स्टाफ, वरिष्ठ चिकित्सक, नर्सिग कॉलेज की प्रधानाअध्यापिका, शिक्षिकाये व छात्रायें के साथ ही साथ पैरामेडिकल विद्यार्थियों व संस्थान के कर्मचारी मौजूद रहे। वहीं संस्थान के सचिव स्वामी मुक्तिनाथानन्द ने 77वें गणतंत्र दिवस की बधाई दी।

उन्होंने कहा कि इस राष्ट्र का आर्दश दुनिया में सर्वश्रेष्ठ आर्दश हमारा राष्ट्रीय आर्दश है। त्याग और सेवा, त्याग और सेवा के आर्दश पर अगर हम अपने अपने जीवन गठन करे,तब जल्दी ही हमारा राष्ट्र विश्व के सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र में समृद्ध होगा।

एक बात याद रखना चाहिए जो हमारे राष्ट्रीय आर्दश है वह प्रत्येग भारतीय का व्यक्तिगत आर्दश भी है। क्योंकि त्याग किसको कहते है एवं सेवा किसको कहते है वह समझना जरूरी है त्याग कोई नितिवाचक मनोभाव नही है। हमारे त्याग का आर्दश है। हम सब, देवी सरस्वती की पूजा करते है उनका वाहन हंसवाहिनी कहलाता है।

हंस त्याग का प्रतीक है जैसे हंस के जिव्हा में एक खट्टा रस रहता है। जिससे वह दूध व पानी मिला देने से वह दूध ले लेता है और पानी छोड़ देता है। संसार में अच्छा व बुरा दो ही रहेगा यह संसार का नियम है। मुक्तिनाथानंद ने कहा कि हमें बुराईयों पर कोसना ठीक नही है।

बुराईया है इसलिए अच्छाईओं का इतना आदर है। जैसे बोर्ड जितना काला होगा उसमें सफेद रंग उतना ही चमकेगा। हमें हंस के जैसा सीखना पड़ेगा, हंस के जैसा नीर क्षीर विवेक नीर को छोड दो क्षीर को ग्रहण करो त्याग कहलाता है।

सेवा इस मनोभाव से सेवा करना चाहिए..

स्वामी ने कहा कि सेवा इस मनोभाव से सेवा करना चाहिए की सेवा हमारे लिए एक अवसर रहे हम लोग स्वामी जी के नामांकित प्रतिष्ठान से जुडे हुए हैं। आप यह विश्वास करो कि यह कोई साधारण प्रतिष्ठान नही है। यह एक आध्यात्मिक ऊर्जा का पुंज है।

स्वामी विवेकानन्द कोई ऐतिहासिक व्यक्तित्व नही है, जीता जागता आध्यात्मिक ऊर्जा है प्रेरणा के श्रोत है। उन्होंने कहा कि स्वामी की प्रतिमा एक मूर्तिमान ऊर्जा है। समप्रसारण ही जीवन है जो हमें आगे बढाने के लिए पीछे से मदद कर रहे हैं ।

हमारे पास 15 विषयों में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन प्रोग्राम और 8 विषयों में पैरामेडिकल डिप्लोमा कोर्स के अलावा अध्ययनरत 500 छात्राओ वाला नर्सिंग कॉलेज है, जो जीएनएम, बीएससी, एमएससी (4 विषयों में) छात्राये शिक्षा ग्रहण कर रही हैं।

पीएचडी प्रोग्राम पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिग कोर्स शुरू करने तथा एलाइड हेल्थ साइंस नाम से 8 विषयों में ग्रेजुएट पैरामेडिकल कोर्स शुरू करने के लिए हम प्रयासरत है जो हमारे संस्थान की गुणवत्ता को बढायेगा।

स्वामी मुक्तिनाथानन्द ने कहा कि सेवा खरीदा नही जाता है,सेवा एक मनोभाव है। स्वामी विवेकानन्द कहते है कि सेवा हमारे लिए परम अवसर है और वही हमारे राष्ट्रीय आर्दश है। त्याग बिना सेवा संभव नही है सेवा बिना त्याग निरर्थक है, हमारी राष्ट्रीय परम्परा है सहयोगिता,

सहानूभति, समन्यव, सेवा और शान्ति अगर हम आज प्रत्येक भारतीय संकल्प ले कि समन्यव सेवा और त्याग के मंत्र में हम अपना अपना जीवन आगे बढ़ायेगें तब जल्द ही हमारे राष्ट्र दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बन जायेगा। हम भगवान श्रीरामकृष्ण माँ सारदा तथा स्वामी विवेकानन्द और हमारे देश के जितने महान व्यक्ति अपना जीवन समर्पण किया है।

हमें यह गणतंत्र दिवस पालन करने का अवसर देने में, सब के प्रति मेरा प्रणाम और सबके आर्शिवाद से हमारे प्रतिष्ठान को सबसे आगे ले जाये और सेवा व समर्पण का एक आर्दश प्रतिष्ठान बनाये।

आज के इस पावन अवसर पर यह आवश्यक है कि हम सभी राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को समझें। शिक्षार्थियों के रूप में अनुशासन, परिश्रम और नैतिक मूल्यों को अपनाना तथा कर्मचारियों के रूप में ईमानदारी, समर्पण और सेवा भाव के साथ कार्य करना ही सच्ची देशसेवा है।

आइए, इस गणतंत्र दिवस पर हम यह संकल्प लें कि हम संविधान का सम्मान करेंगे, राष्ट्रीय एकता और अखंडता बनाए रखेंगे, तथा सेवा, त्याग व शिक्षा के माध्यम से भारत को आत्मनिर्भर, सशक्त और प्रगतिशील राष्ट्र बनाने में अपना पूर्ण योगदान देंगे।

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