केजीएमयू में अवैध मजारों के खिलाफ नोटिस जारी
केजीएमयू प्रशासन ने मजार अतिक्रमण को हटाने को थमाई नोटिस

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में फैली अवैध मजारों के खिलाफ नोटिस जारी कर दी गई है। शुक्रवार को संस्थान प्रशासन ने विभिन्न विभागों में फैली मजारों के अतिक्रमण पर सख्त रुख अख्तियार करते हुए नोटिस जारी की गयी है।
जिसे संस्थान के भूमि अधिग्रहण नोडल अधिकारी प्रो केके सिंह, द्वारा जारी नोटिस में संस्थान के माइक्रोबायोलॉजी विभाग भवन-2 के पीछे परिसर की भूमि पर निर्मित अवैध मजार अतिक्रमण को तत्काल हटाये जाने के लिए प्रशासन को पत्र जारी किया है।
संस्थान कुलपति प्रो सोनिया नित्यानंद द्वारा अवैध मजारों को हटाने के लिए नोडल अधिकारी, भूमि अधिग्रहण प्रो केके सिंह अधिकृत किये जाने के उपरान्त कानूनी नोटिस जारी की गयी है। जारी नोटिस में संस्थान एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं चिकित्सीय संस्थान है।
जिसकी भूमि का उपयोग केवल शैक्षणिक, चिकित्सीय एवं प्रशासनिक कार्यों के लिए किया जाना विधिसम्मत है। वहीं विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभाग भवन-2 के पीछे परिसर की भूमि पर अवैध मजार द्वारा बिना किसी वैघ अनुमति, स्वीकृति अथवा न्यायिक आदेश के अवैध रूप से मजार का निर्माण संचालन कर अतिक्रमण किया गया है।
संस्थान प्रशासन का कहना है कि जो पूर्णतः गैर-कानूनी एवं नियमों के विरुद्ध है। अवैध मजार के चलते विश्वविद्यालय परिसर में अनावश्यक भीड़, आवागमन में बाधा, शांति भंग होने की स्थिति, स्वच्छता एवं सुरक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जिससे मरीजों, महिला कर्मचारियों, रेजिडेंट डॉक्टरों एवं छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। जबकि
यह कि विश्वविद्यालय परिसर में इस प्रकार का कोई भी धार्मिक व्यावसायिक,अनधिकृत निर्माण विधि द्वारा निषिद्ध है तथा यह सार्वजनिक संपत्ति पर अवैध अतिक्रमण की श्रेणी में आता है।
जारी नोटिस के माध्यम से एक अवसर प्रदान करते हुए नोटिस की प्राप्ति की तिथि से 15 (पंद्रह) दिनों के भीतर स्वयं अपने खर्चे पर उक्त अवैध मजार,अतिक्रमण को पूर्णतः हटाकर विश्वविद्यालय की भूमि को मूल अवस्था में खाली कर विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंप दें। साथ ही
यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि उपरोक्त निर्धारित अवधि में आप द्वारा अवैध मजार,अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो विश्वविद्यालय प्रशासन को बाध्य होकर प्रशासनिक व विधिक कार्रवाई करनी पड़ेगी। जिसके अंतर्गत बलपूर्वक ध्वस्तीकरण हटाने की कार्रवाई तथा अन्य सभी वैधानिक उपाय सम्मिलित होंगे।
जारी नोटिस का अनुपालन न होने पर अतिक्रमण हटाने में होने वाला समस्त व्यय, ध्वस्तीकरण खर्च, पुलिस बल खर्च एवं अन्य हर्जाना,क्षतिपूर्ति की पूरी राशि अतिक्रमणकारियों से विधि अनुसार वसूली की जाएगी। जिसके लिए अतिक्रमण करने वाले स्वयं उत्तरदायी होंगे। साथ ही यह भी कहा गया कि
यह नोटिस अंतिम चेतावनी के रूप में भेजा जा रहा है। इसके उपरांत किसी प्रकार की शिथिलता अथवा सहानुभूति नहीं बरती जायेगी और समस्त दुष्परिणामों के लिए आप स्वयं जिम्मेदार होंगे।
वही संस्थान प्रशासन अपेक्षा व्यक्त करते हुए कहा कि अनावश्यक विधिक विवाद से बचने के लिए नोटिस का पालन करते हुए निर्धारित समयावधि में अवैध मजार,अतिक्रमण को हटाकर विश्वविद्यालय परिसर को अतिक्रमण मुक्त करें।
वहीं संस्थान प्रशासन द्वारा जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नरेट को नोटिस प्रेषित कर दी गई। ज्ञात हो कि संस्थान में दूर दराज से आने वाले मरीजों का मेला बना रहता है। संस्थान प्रशासन रोगी हित में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।



